Qurani·قرآني
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गुस्सा

9 दुआएं

1 أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ मैं शैतान के मंजूर से अल्लाह की शरण में जाता हूँ। 2 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ अल्लाह के सिवा कोई ईश्वर नहीं है। (खड़े होने पर बैठ जाएं; बैठने पर लेट जाएं) 3 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ अल्लाह के सिवा कोई ईश्वर नहीं है। (शरण चाहें, तो खड़े होने पर बैठ जाएं; बैठें तो लेट जाएं) ×3 4 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ अल्लाह, मैं शैतान के मंजूर से तेरी शरण मांगता हूँ। (और वु'zू करूं to गुस्सा शांत हो जाए) 5 أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ मैं शैतान के मंजूर से अल्लाह की शरण में हूँ। (खड़े होने पर बैठ जाएं; वु'zू करें) ×3 6 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ… अल्लाह, मैं शैतान के भड़काने से तेरी शरण चाहता हूँ, और मैं तेरे पास, मेरे रब, से उनकी मौजूदगी से शरण चाहता हूँ। 7 سُبْحَانَ اللَّهِ अल्लाह की तारीफ हो। (जब गुस्सा आए तो कहें — यह आत्मा को शांत करता है) ×3 8 إِنَّ اللَّهَ يُمْهِلُ وَلَا يُهْمِلُ बेशक, अल्लाह राहत देता है, लेकिन उपेक्षा नहीं करता। (गुस्सा रोकने का स्मरण) 9 اللَّهُمَّ أَزِلْ غَيْظَ قَلْبِي وَأَعِذْنِي مِنَ الشَّيْطَانِ अल्लाह, मेरे दिल से क्रोध को दूर कर, और मुझे शैतान से बचा।