Qurani·قرآني
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मृत्यु & जनाज़ा

12 दुआएं

1 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ… ऐ अल्लाह! इसे बख़्श दे, इस पर रहम फ़रमा, इसे आफ़ियत दे, इसे माफ़ कर दे, इसकी मेहमान-नवाज़ी को इज़्ज़त दे, इसकी क़ब्र को कुशादा कर दे, और इसे… 2 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِحَيِّنَا وَمَيِّتِنَا، وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا، وَصَغِيرِ… ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदों और हमारे मुर्दों को, हमारे मौजूद और हमारे ग़ायब लोगों को, हमारे छोटों और हमारे बड़ों को, और हमारे मर्दों और हमारी और… 3 إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ बेशक हम अल्लाह ही के हैं और हमें उसी की तरफ़ लौटकर जाना है। 4 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْفَعْ دَرَجَتَهُ فِي الْمَهْدِيِّينَ وَاخْلُفْهُ فِي… ऐ अल्लाह! इसे बख्श दे, हिदायत पाए हुए लोगों में इसका दर्जा बुलंद फरमा और इसके पीछे रह जाने वालों में इसका निगरान बन जा। ऐ तमाम जहानों के रब!… 5 اللَّهُمَّ عَبْدُكَ وَابْنُ أَمَتِكَ احْتَاجَ إِلَى رَحْمَتِكَ وَأَنْتَ غَنِيٌّ … ऐ अल्लाह! तेरा यह बंदा और तेरी बंदी का बेटा तेरी रहमत का मोहताज है, और तू इसे अज़ाब देने से बेनियाज़ है। 6 اللَّهُمَّ إِنَّ فُلَانَ بْنَ فُلَانٍ فِي ذِمَّتِكَ وَحَبْلِ جِوَارِكَ فَقِهِ مِ… ऐ अल्लाह, फलाँ का बेटा फलाँ तेरी पनाह और तेरी हिफाज़त में है, तू उसे क़ब्र की आज़माइश और आग (जहन्नम) के अज़ाब से बचा ले। 7 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِحَيِّنَا وَمَيِّتِنَا وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا وَصَغِيرِنَ… ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदों और हमारे मुर्दों को, हमारे मौजूद और हमारे ग़ायब लोगों को, हमारे छोटों और हमारे बड़ों को, और हमारे मर्दों और हमारी और… 8 اللَّهُمَّ مَنْ أَحْيَيْتَهُ مِنَّا فَأَحْيِهِ عَلَى الْإِسْلَامِ وَمَنْ تَوَفَّ… ऐ अल्लाह! हम में से तू जिसे ज़िंदा रखे उसे इस्लाम पर ज़िंदा रख, और जिसे मौत दे उसे ईमान पर मौत दे। 9 إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ اللَّهُمَّ أْجُرْنِي فِي مُصِيبَتِي … बेशक हम अल्लाह ही के लिए हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं। ऐ अल्लाह, मुझे मेरी इस मुसीबत पर अज्र अता फ़रमा और मुझे इसका बेहतर बदल अता … 10 اللَّهُمَّ أَحْسِنْ خَاتِمَتِي فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا ऐ अल्लाह! तमाम मामलों में मेरा अंजाम (अंत) बेहतर कर दे। 11 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِأَمْوَاتِنَا وَأَمْوَاتِ الْمُسْلِمِينَ ऐ अल्लाह, हमारे मरहूमों की और तमाम मुसलमान मरहूमों की मगफिरत फरमा। 12 اللَّهُمَّ اجْعَلْ خَيْرَ أَعْمَارِنَا آخِرَهَا وَخَيْرَ أَعْمَالِنَا خَوَاتِمَه… ऐ अल्लाह, हमारी उम्र का सबसे बेहतरीन हिस्सा उसका आख़िर बना दे, हमारे आमाल में सबसे बेहतर हमारा ख़ातिमा बना दे और हमारे दिनों में सबसे बेहतरी…