Qurani·قرآني
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निकाह

13 दुआएं

1 بَارَكَ اللَّهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيْكَ وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ अल्लाह तुम्हें बरकत दे, तुम पर अपनी बरकतें नाज़िल फ़रमाए और तुम दोनों को भलाई के साथ इकट्ठा रखे। 2 اللَّهُمَّ بَارِكْ فِي زَوْجِي وَبَارِكْ لَهُ فِيَّ ऐ अल्लाह! मेरे जीवनसाथी में बरकत दे और उसके लिए मुझमें बरकत अता फरमा। 3 رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَل… ऐ हमारे रब, हमें हमारी बीवियों और हमारी औलाद से आँखों की ठंडक अता फ़रमा और हमें परहेज़गारों का इमाम बना। 4 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ وَأَعُو… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इसकी भलाई और उस स्वभाव की भलाई का सवाल करता हूँ जिस पर तूने इसे पैदा किया है, और मैं इसकी बुराई और उस स्वभाव की बुराई से… 5 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ وَأَعُو… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इसकी भलाई और उस स्वभाव की भलाई का सवाल करता हूँ जिस पर तूने इसे पैदा किया है, और मैं इसकी बुराई और उस स्वभाव की बुराई से… 6 اللَّهُمَّ أَلِّفْ بَيْنَ قُلُوبِنَا وَأَصْلِحْ ذَاتَ بَيْنِنَا ऐ अल्लाह, हमारे दिलों में मेल-मिलाप पैदा कर दे और हमारे आपसी ताल्लुक़ात को दुरुस्त कर दे। 7 رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنْزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ ऐ मेरे रब! तू जो भी भलाई मेरी तरफ़ उतारे, मैं उसका मोहताज हूँ। 8 بَارَكَ اللَّهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيْكَ وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ अल्लाह तुम्हें बरकत दे, तुम पर अपनी बरकतें नाज़िल फ़रमाए और तुम दोनों को भलाई के साथ इकट्ठा रखे। 9 اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي زَوْجًا صَالِحًا يُعِينُنِي عَلَى أَمْرِ دِينِي وَدُنْيَاي… ऐ अल्लाह, मुझे एक नेक जीवनसाथी अता फरमा जो मेरे दीन, मेरी दुनिया और मेरी रोज़ी-रोटी के मामलों में मेरी मदद करे। 10 اللَّهُمَّ بَارِكْ فِي زَوَاجِنَا وَأَلِّفْ بَيْنَ قُلُوبِنَا ऐ अल्लाह! हमारे निकाह में बरकत अता फ़रमा और हमारे दिलों को आपस में जोड़ दे। 11 اللَّهُمَّ أَلِّفْ بَيْنَنَا وَأَصْلِحْ ذَاتَ بَيْنِنَا وَاجْعَلْنَا مِنْ عِبَاد… ऐ अल्लाह, हमारे दिलों को जोड़ दे, हमारे आपसी तालुकात की इस्लाह फरमा और हमें अपने नेक बंदों में शामिल कर ले। 12 اللَّهُمَّ ارْزُقْنَا السَّكِينَةَ وَالْمَوَدَّةَ وَالرَّحْمَةَ فِي بُيُوتِنَا ऐ अल्लाह, हमारे घरों में हमें सुकून, मुहब्बत और रहमत अता फरमा। 13 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِهَا وَخَيْرِ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ وَ… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे इसकी भलाई और उस फ़ितरत की भलाई का सवाल करता हूँ जिस पर तूने इसे पैदा किया, और मैं इसके शर और उस फ़ितरत के शर से तेरी पना…