इल्म की तलब
29 दुआएं
1
رَبِّ زِدْنِي عِلْمًا
ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फरमा।
2
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُت…
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा पहुँचाने वाले इल्म, पाकीज़ा रिज़्क़ और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ।
3
اللَّهُمَّ انْفَعْنِي بِمَا عَلَّمْتَنِي، وَعَلِّمْنِي مَا يَنْفَعُنِي، وَزِدْنِ…
ऐ अल्लाह! जो इल्म तूने मुझे सिखाया है उससे मुझे फायदा पहुँचा, और मुझे वह इल्म सिखा जो मेरे लिए फायदेमंद हो, और मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फरमा।
4
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عِلْمٍ لَا يَنْفَعُ، وَمِنْ قَلْبٍ لَا يَخْش…
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ ऐसे इल्म से जो फायदा न दे, ऐसे दिल से जिसमें तेरा डर न हो, ऐसे नफ़्स से जो कभी न भरे और ऐसी दुआ से जो क़ब…
5
رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ
ऐ मेरे रब! मुझे हिकमत (समझ) अता कर और मुझे नेक लोगों में शामिल कर।
6
اللَّهُمَّ فَقِّهْنِي فِي الدِّينِ
ऐ अल्लाह! मुझे दीन की गहरी समझ अता फरमा।
7
رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنْتَ خَيْرُ الْفَات…
ऐ हमारे रब! हमारे और हमारी कौम के दरमियान हक़ के साथ फैसला कर दे, और तू सबसे बेहतर फैसला करने वाला है।
8
اللَّهُمَّ أَرِنِي الْحَقَّ حَقًّا وَارْزُقْنِي اتِّبَاعَهُ، وَأَرِنِي الْبَاطِل…
ऐ अल्लाह! मुझे हक़ को हक़ दिखा और मुझे उसकी पैरवी करने की तौफीक दे, और मुझे बातिल को बातिल दिखा और मुझे उससे बचने की तौफीक दे।
9
اللَّهُمَّ نَوِّرْ بِالْكِتَابِ بَصَرِي، وَاشْرَحْ بِهِ صَدْرِي، وَاسْتَعْمِلْ ب…
ऐ अल्लाह! (अपनी) किताब के ज़रिए मेरी निगाह को रौशन कर दे, इसके ज़रिए मेरे सीने को खोल दे और मेरे बदन को इसके (अमल) में लगा दे।
10
اللَّهُمَّ عَلِّمْنَا مَا يَنْفَعُنَا وَانْفَعْنَا بِمَا عَلَّمْتَنَا وَزِدْنَا …
ऐ अल्लाह! हमें वह इल्म सिखा जो हमें फायदा पहुँचाए, और जो इल्म तूने हमें सिखाया है उससे हमें फायदा पहुँचा, और हमारे इल्म में इज़ाफ़ा फरमा।
11
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا وَعَمَلًا صَالِحًا وَرِزْقًا طَيِّ…
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा देने वाले इल्म, नेक अमल और पाकीज़ा रिज़्क़ का सवाल करता हूँ।
12
اللَّهُمَّ اجْعَلِ الْقُرْآنَ رَبِيعَ قَلْبِي وَنُورَ صَدْرِي وَجَلَاءَ حُزْنِي …
ऐ अल्लाह! क़ुरआन को मेरे दिल की बहार, मेरे सीने का नूर, मेरे रंज-ओ-ग़म का मुदावा और मेरी परेशानियों को दूर करने वाला बना दे।
13
رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ وَاجْعَلْ لِي لِسَانَ صِد…
ऐ मेरे रब! मुझे हिकमत (दानिशमंदी) अता फ़रमा और मुझे नेक लोगों में शामिल कर दे, और बाद में आने वाली नस्लों में मेरा ज़िक्र-ए-खैर बाक़ी रख।
14
اللَّهُمَّ فَهِّمْنِي فِي الدِّينِ وَعَلِّمْنِي التَّأْوِيلَ
ऐ अल्लाह! मुझे दीन की समझ अता फ़रमा और मुझे (क़ुरआन की) तफ़्सीर व तावील का इल्म सिखा।
15
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فَهْمَ النَّبِيِّينَ وَحِفْظَ الْمُرْسَلِينَ وَإِلْ…
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे नबियों जैसी समझ, रसूलों जैसा हाफ़िज़ा (याददाश्त) और मुक़र्रब (क़रीबी) फ़रिश्तों जैसा इल्हाम माँगता हूँ।
16
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَانِي…
ऐ मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे, और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे, और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे, ताकि वे मेरी बात समझ सकें।
17
اللَّهُمَّ اجْعَلِ الْقُرْآنَ الْعَظِيمَ رَبِيعَ قَلْبِي وَنُورَ بَصَرِي وَجَلَا…
ऐ अल्लाह, अज़मत वाले क़ुरआन को मेरे दिल की बहार, मेरी आँखों का नूर, मेरे ग़मों को दूर करने वाला और मेरी परेशानियों और चिंताओं को मिटाने वाला…
18
اللَّهُمَّ انْفَعْنِي بِمَا عَلَّمْتَنِي وَعَلِّمْنِي مَا يَنْفَعُنِي وَزِدْنِي …
ऐ अल्लाह! जो इल्म तूने मुझे सिखाया है उससे मुझे फायदा पहुँचा, और मुझे वह इल्म सिखा जो मेरे लिए फायदेमंद हो, और मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फरमा।
19
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عِلْمٍ لَا يَنْفَعُ وَمِنْ قَلْبٍ لَا يَخْشَ…
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ ऐसे इल्म से जो फायदा न दे, ऐसे दिल से जिसमें तेरा डर न हो, ऐसे नफ़्स से जो कभी न भरे और ऐसी दुआ से जो क़ब…
20
رَبِّ زِدْنِي عِلْمًا وَفَهْمًا
ऐ मेरे रब! मेरे इल्म और समझ में इज़ाफ़ा फरमा।
21
اللَّهُمَّ عَلِّمْنِي مَا يَنْفَعُنِي وَانْفَعْنِي بِمَا عَلَّمْتَنِي وَزِدْنِي …
ऐ अल्लाह! मुझे वो इल्म सिखा जो मेरे लिए फ़ायदेमंद हो, और जो कुछ तूने मुझे सिखाया है उससे मुझे फ़ायदा पहुँचा, और मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फ़रमा।
22
رَبِّ زِدْنِي عِلْمًا
ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फरमा।
23
اللَّهُمَّ أَرِنِي الْحَقَّ حَقًّا وَارْزُقْنِي اتِّبَاعَهُ وَأَرِنِي الْبَاطِلَ…
ऐ अल्लाह! मुझे हक़ को हक़ दिखा और मुझे उसकी पैरवी करने की तौफीक दे, और मुझे बातिल को बातिल दिखा और मुझे उससे बचने की तौफीक दे।
24
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمَ الْخَاشِعِينَ
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे उन लोगों के इल्म (ज्ञान) का सवाल करता हूँ जो (तेरे सामने) आज़िज़ी के साथ झुक जाने वाले हैं।
25
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنْ أَهْلِ الْقُرْآنِ الَّذِينَ هُمْ أَهْلُكَ وَخَاصَّتُك…
ऐ अल्लाह! मुझे क़ुरआन वालों में शामिल फ़रमा, जो तेरे (ख़ास) लोग और मुक़र्रब बंदे हैं।
26
اللَّهُمَّ أَرِنَا الْحَقَّ حَقًّا وَارْزُقْنَا اتِّبَاعَهُ وَأَرِنَا الْبَاطِلَ…
ऐ अल्लाह! हमें हक़ को हक़ दिखा और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे, और बातिल को बातिल दिखा और उससे बचने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।
27
اللَّهُمَّ عَلِّمْنَا مَا جَهِلْنَا وَذَكِّرْنَا مَا نَسِينَا وَافْتَحْ عَلَيْنَ…
ऐ अल्लाह! हमें वह सिखा दे जिससे हम नावाकिफ़ हैं, और हमें वह याद दिला दे जो हम भूल गए हैं, और हमारे लिए आसमान और ज़मीन की बरकतें खोल दे।
28
اللَّهُمَّ افْتَحْ عَلَيْنَا حِكْمَتَكَ وَانْشُرْ عَلَيْنَا مِنْ خَزَائِنِ رَحْم…
ऐ अल्लाह, हमारे लिए अपनी हिकमत के दरवाज़े खोल दे और हम पर अपनी रहमत के खज़ाने लुटा दे।
29
اللَّهُمَّ انْفَعْنِي بِمَا عَلَّمْتَنِي وَعَلِّمْنِي مَا يَنْفَعُنِي وَزِدْنِي …
ऐ अल्लाह! जो इल्म तूने मुझे सिखाया है उससे मुझे फायदा पहुँचा, और मुझे वह इल्म सिखा जो मेरे लिए फायदेमंद हो, और मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फरमा।