कामयाबी
18 दुआएं
1
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَ…
ऐ मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे, और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे, और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे, ताकि वे मेरी बात समझ सकें।
2
رَبَّنَا آتِنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
ऐ हमारे रब, हमें अपने पास से रहमत अता फरमा और हमारे मामले में हमारे लिए हिदायत (सही रास्ते) का सामान कर दे।
3
رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنْزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ
ऐ मेरे रब! तू जो भी भलाई मेरी तरफ़ उतारे, मैं उसका मोहताज हूँ।
4
اللَّهُمَّ لَا سَهْلَ إِلَّا مَا جَعَلْتَهُ سَهْلًا وَأَنْتَ تَجْعَلُ الْحَزْنَ …
ऐ अल्लाह, कोई भी काम आसान नहीं है सिवाय उसके जिसे तू आसान कर दे, और तू जब चाहता है मुश्किल को भी आसान बना देता है।
5
اللَّهُمَّ يَسِّرْ وَلَا تُعَسِّرْ وَتَمِّمْ بِالْخَيْرِ
ऐ अल्लाह! (मेरे लिए) आसानी पैदा कर और तंगी न कर, और (इस काम को) खैर व खूबी के साथ मुकम्मल फरमा।
6
اللَّهُمَّ لَا سَهْلَ إِلَّا مَا جَعَلْتَهُ سَهْلًا
ऐ अल्लाह! कोई काम आसान नहीं मगर वही जिसे तू आसान कर दे।
7
رَبِّ أَنْزِلْنِي مُنْزَلًا مُبَارَكًا وَأَنْتَ خَيْرُ الْمُنْزِلِينَ
ऐ मेरे रब! मुझे बरकत वाली जगह उतार, और तू सबसे बेहतर उतारने वाला है।
8
رَبَّنَا آتِنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
ऐ हमारे रब, हमें अपने पास से रहमत अता फरमा और हमारे मामले में हमारे लिए हिदायत (सही रास्ते) का सामान कर दे।
9
اللَّهُمَّ لَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ وَأَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُ…
ऐ अल्लाह! मुझे पल भर के लिए भी मेरे अपने हाल पर न छोड़ और मेरे तमाम कामों को दुरुस्त कर दे।
10
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ التَّوْفِيقَ وَالسَّدَادَ فِي أُمُورِي كُلِّهَا
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे अपने तमाम मामलात में कामयाबी और दुरुस्तगी का सवाल करता हूँ।
11
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي
ऐ मेरे रब! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे और मेरे लिए मेरा काम आसान कर दे।
12
اللَّهُمَّ سَهِّلْ عَلَيْنَا مَا اسْتَصْعَبْنَاهُ وَيَسِّرْ لَنَا مَا اسْتَعْسَر…
ऐ अल्लाह, हमारे लिए वह आसान कर दे जिसे हमने कठिन पाया और हमारे लिए वह सुगम कर दे जिसे हमने मुश्किल पाया।
13
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ الْمُفْلِحِينَ
ऐ अल्लाह! मुझे कामयाब लोगों में शामिल फ़रमा।
14
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْك…
ऐ हमारे रब, हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर दे और हमें अपने पास से रहमत अता फरमा, बेशक तू ही बड़ा अता करने वाला है।
15
اللَّهُمَّ وَفِّقْنَا لِمَا تُحِبُّ وَتَرْضَى مِنَ الْقَوْلِ وَالْعَمَلِ
ऐ अल्लाह, हमें उन बातों और कामों की तौफीक दे जिन्हें तू पसंद करता है और जिनसे तू राज़ी होता है।
16
اللَّهُمَّ افْتَحْ عَلَيْنَا أَبْوَابَ الْخَيْرِ وَالْبَرَكَةِ
ऐ अल्लाह, हमारे लिए खैर और बरकत के दरवाज़े खोल दे।
17
اللَّهُمَّ يَسِّرْ أُمُورَنَا وَفَرِّجْ هُمُومَنَا وَاكْشِفْ غُمُومَنَا
ऐ अल्लाह, हमारे कामों में आसानी पैदा फरमा, हमारी परेशानियों को दूर कर और हमारे ग़मों को मिटा दे।
18
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي
ऐ मेरे रब! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे और मेरे लिए मेरा काम आसान कर दे।