हिम्मत
13 दुआएं
1
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْجُبْنِ وَالْبُخْل…
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ कमजोरी, सुस्ती, बुज़दिली, कंजूसी, बुढ़ापे की लाचारी और कब्र के अज़ाब से।
2
اللَّهُمَّ أَعِنِّي وَلَا تُعِنْ عَلَيَّ، وَانْصُرْنِي وَلَا تَنْصُرْ عَلَيَّ
ऐ अल्लाह, मेरी मदद फरमा और मेरे खिलाफ (किसी की) मदद न फरमा, मुझे कामयाबी अता कर और मेरे खिलाफ किसी को कामयाब न कर।
3
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ
अल्लाह के सिवा न कोई ताकत है और न कोई कुव्वत, जो बहुत बुलंद और अज़ीम है।
4
اللَّهُمَّ أَعِنِّي وَلَا تُعِنْ عَلَيَّ وَانْصُرْنِي وَلَا تَنْصُرْ عَلَيَّ وَا…
ऐ अल्लाह! मेरी मदद फरमा और मेरे खिलाफ किसी की मदद न कर, मुझे फतह अता कर और मेरे खिलाफ किसी को फतह न दे, मेरे हक में तदबीर फरमा और मेरे खिलाफ…
5
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الصِّحَّةَ وَالْعِفَّةَ وَالْأَمَانَةَ وَحُسْنَ الْ…
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सेहत, पाकदामनी, अमानतदारी, अच्छे अख़्लाक़ और तक़दीर पर राज़ी रहने का सवाल करता हूँ।
6
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْقُوَّةَ فِي الْعِبَادَةِ وَالْعَزِيمَةَ عَلَى ال…
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इबादत में कु़व्वत (ताक़त), हिदायत पर दृढ़ता और तेरी नेमतों पर शुक्रगुज़ारी का सवाल करता हूँ।
7
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ
अल्लाह के सिवा न कोई ताकत है और न कोई कुव्वत, जो बहुत बुलंद और अज़ीम है।
8
اللَّهُمَّ قَوِّ ضَعْفِي وَارْحَمْ ذُلِّي وَارْفَعْ خَسِيسَتِي
ऐ अल्लाह! मेरी कमज़ोरी को ताक़त में बदल दे, मेरी बेबसी पर रहम फ़रमा और मेरी पस्ती को दूर करके मुझे बुलंदी अता कर।
9
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
ऐ अल्लाह, अपने ज़िक्र, शुक्र और बेहतरीन इबादत पर मेरी मदद फरमा।
10
اللَّهُمَّ قَوِّنِي عَلَى طَاعَتِكَ وَاصْرِفْنِي عَنْ مَعَاصِيكَ
ऐ अल्लाह! मुझे अपनी इबादत और फ़रमाँबरदारी के लिए मज़बूत कर दे, और मुझे अपनी नाफ़रमानियों से दूर रख।
11
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَزِيمَةَ عَلَى الرُّشْدِ وَالْغَنِيمَةَ مِنْ كُ…
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हिदायत पर साबित-कदमी और हर नेक काम से फायदा हासिल करने का सवाल करता हूँ।
12
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْقُوَّةَ عَلَى الْحَقِّ وَالصَّبْرَ عَلَى الْبَلَ…
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हक़ पर मज़बूती और आज़माइश पर सब्र का सवाल करता हूँ।
13
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْبُخْلِ وَالْجُبْن…
ऐ अल्लाह, मैं बेबसी, सुस्ती, कंजूसी, बुज़दिली, कर्ज़ के बोझ और लोगों के ज़ोर व ज़ुल्म से तेरी पनाह माँगता हूँ।