जागने के अज़कार
15 दुआएं
1
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
प्रशंसा है उस अल्लाह की जिसने हमें मौत के बाद जीवन दिया, और उसी के पास पुनरुत्थान है।
2
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
कोई पूजा का हकदार नहीं, केवल अल्लाह ही, उसका साझेदार नहीं। उसकी ही सत्ता और प्रशंसा है, वह सबकुछ कर सकता है। अल्लाह की महिमा हो, अल्लाह की प…
3
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي عَافَانِي فِي جَسَدِي، وَرَدَّ عَلَيَّ رُوحِي، وَأَذِن…
अल्लाह की प्रशंसा है जिसने मुझे मेरे शरीर में स्वस्थयता दी, मेरी आत्मा वापस दी, और मुझे उसको याद करने का मौका बनाया।
4
اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ أَمْسَيْنَا وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ وَإ…
अल्लाह, तुझ ही के नाम से हम सुबह करते हैं, तुझ ही के नाम से हम शाम में प्रवेश करते हैं, तुझ ही के नाम से हम जीते हैं, तुझ ही के नाम से हम मर…
5
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
महिमा और प्रशंसा अल्लाह के लिए है। (जागते ही सबसे पहले कहें)
6
لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ أَسْتَغْفِرُكَ لِذَنْبِي وَأَسْأ…
तू ही एक मात्र ईश्वर है, हे अल्लाह, तू ही महिमा का पात्र है। अपने गुनाहों की माफी माँगता हूँ और तेरा शुक्रिया अदा करता हूँ।
7
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذَا الْيَوْمِ: فَتْحَهُ وَنَصْرَهُ وَنُورَ…
अल्लाह, मैं तुझसे इस दिन की अच्छाई, उसकी शुरुआत, उसकी मदद, उसकी रौशनी, उसकी बरकत और उसकी हिदायत की माँग करता हूँ।
8
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي رَدَّ عَلَيَّ رُوحِي وَعَافَانِي فِي جَسَدِي وَأَذِنَ …
उसने मेरी आत्मा को लौटाया और मुझे भलाई दी, तुझ ही की यादगार है।
9
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَم…
तू ही के नाम से हम सुबह उठते हैं, तुझ ही के नाम से हम शाम का खाना खाते हैं, तुझ ही के नाम से हम जीते हैं, तुझ ही के नाम से मरते हैं, और तुझ …
10
اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ وَمَلَائِكَ…
अल्लाह, मैं तुझ ही के नाम से जीता हूँ और तुझ ही के नाम से मरता हूँ, और तुझ ही की ओर से पुनरुत्थान है।
×4
11
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ عَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَأَنْتَ …
अल्लाह का हर शुक्र है जिसने मेरी सेहत वापिस लौटाई, मेरी आत्मा को वापस दी, और मुझे उसकी याद बनाने का मौका दिया।
12
اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ و…
अल्लाह के नाम से। (खाने से पहले कहें)
13
اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ أَمْسَيْنَا وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ وَإ…
अल्लाह के नाम से, उसके शुरुआत और अंत में। (अगर गलत हो जाए तो बिस्मिल्लाह कहने से पहले भूल गए)
14
اللَّهُمَّ بِاسْمِكَ أَحْيَا وَبِاسْمِكَ أَمُوتُ وَإِلَيْكَ النُّشُورُ
अल्लाह की प्रशंसा है जिसने मुझे इस भोजन का वज़ीफा दिया और मुझे मेरे बल या शक्ति से बिना कुछ कहे ही प्रदान किया। (खाने के बाद)
15
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي عَافَانِي فِي جَسَدِي وَرَدَّ عَلَيَّ رُوحِي وَأَذِنَ …
अल्लाह की प्रशंसा है, ऐसी बहुतायत, सुंदर, और बरकत वाली प्रशंसा। वह ही काफ़ी है, जो खाता भी है और खिलाया भी जाता है। वही दीर्घकाल से साथ है औ…