Qurani·قرآني
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चिंता

19 दुआएं

1 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ ऐ अल्लाह, मैं चिंता और शोक से तेरी पनाह माँगता हूँ। 2 لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है। बेशक मैं ही ज़ालिमों (क़ुसूरवारों) में से हूँ। 3 اللَّهُمَّ إِنِّي عَبْدُكَ ابْنُ عَبْدِكَ ابْنُ أَمَتِكَ، نَاصِيَتِي بِيَدِكَ، م… ऐ अल्लाह, मैं तेरा बंदा हूँ, तेरे बंदे का बेटा और तेरी बंदी का बेटा हूँ। मेरी पेशानी तेरे हाथ में है। मुझ पर तेरा हुक्म जारी है, मेरे बारे म… 4 حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر… मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं। मैंने उसी पर भरोसा किया और वही अज़ीम अर्श का रब है। 5 لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ न कोई ताक़त है न कोई कुव्वत, मगर अल्लाह की मदद से। 6 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ ऐ अल्लाह, मैं कमज़ोरी और सुस्ती से तेरी पनाह माँगता हूँ। 7 اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِ… ऐ अल्लाह, मुझे अपने हलाल रिज़्क़ के साथ अपने हराम से बचाते हुए काफ़ी हो जा, और मुझे अपने फ़ज़्ल से अपने सिवा हर किसी से बेनयाज़ कर दे। 8 اللَّهُمَّ فَارِجَ الْهَمِّ كَاشِفَ الْغَمِّ مُجِيبَ دَعْوَةِ الْمُضْطَرِّينَ ऐ अल्लाह, परेशानियों को दूर करने वाले, दुखों को मिटाने वाले और बेबसों की पुकार सुनने वाले। 9 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْجُبْنِ وَالْهَرَم… ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ बेबसी, सुस्ती, बुज़दिली, बुढ़ापे और कंजूसी से। 10 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ… ऐ अल्लाह, मैं फ़िक्र और ग़म, बेबसी और सुस्ती, कंजूसी और बुज़दिली, क़र्ज़ के बोझ और लोगों के ग़लबे से तेरी पनाह माँगता हूँ। 11 وَأُفَوِّضُ أَمْرِي إِلَى اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ और मैं अपना मामला अल्लाह को सौंपता हूँ, बेशक अल्लाह अपने बंदों को खूब देखने वाला है। 12 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ ऐ अल्लाह, मैं चिंता और शोक से तेरी पनाह माँगता हूँ। 13 اللَّهُمَّ لَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ ऐ अल्लाह! मुझे पलक झपकने भर के लिए भी मेरे अपने नफ़्स (स्वयं) के हवाले न कर। 14 اللَّهُمَّ إِنِّي عَبْدُكَ ابْنُ عَبْدِكَ ابْنُ أَمَتِكَ نَاصِيَتِي بِيَدِكَ مَا… हे अल्लाह! मैं तेरा बंदा हूँ, तेरे बंदे का बेटा हूँ और तेरी बंदी का बेटा हूँ। मेरी पेशानी (माथा) तेरे हाथ में है। मुझ पर तेरा ही हुक्म चलता … 15 اللَّهُمَّ اجْعَلْ لِي مِنْ أَمْرِي يُسْرًا ए अल्लाह, मेरे कामों में मेरे लिए आसानी पैदा फरमा। 16 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ السَّكِينَةَ وَالطُّمَأْنِينَةَ ए अल्लाह, मैं तुझसे दिल के सुकून और इत्मीनान का सवाल करता हूँ। 17 أَلَا بِذِكْرِ اللَّهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُ बेशक, अल्लाह की याद ही से दिलों को सुकून मिलता है। 18 اللَّهُمَّ اجْعَلْ هَمِّي هَمَّ الْآخِرَةِ وَاجْعَلْ غِنَايَ فِي قَلْبِي وَاجْمَ… ऐ अल्लाह! मेरी फ़िक्र को आख़िरत की फ़िक्र बना दे, मेरे दिल में बेनियाज़ी पैदा कर दे और मेरे मामलात को संवार दे। 19 لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है। बेशक मैं ही ज़ालिमों (क़ुसूरवारों) में से हूँ।