और सब्र करो, क्योंकि अल्लाह नेकी करने वालों का बदला ज़ाया (व्यर्थ) नहीं करता। — सब्र
وَاصْبِرْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ
लिप्यंतरण: Wasbir fa-innallaaha laa yudee'u ajral-muhsineen
अनुवाद: और सब्र करो, क्योंकि अल्लाह नेकी करने वालों का बदला ज़ाया (व्यर्थ) नहीं करता।
संदर्भ: Quran 11:115