Qurani·قرآني
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हिफ़ाज़त

27 दुआएं

1 أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमों की पनाह माँगता हूँ उसकी तमाम मख़लूक़ात की बुराई से। 2 بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا… अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, और वह सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है। 3 أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ غَضَبِهِ وَعِقَابِهِ، وَشَرِّ عِبَ… मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमों की पनाह माँगता हूँ उसके ग़ज़ब और उसकी सज़ा से, और उसके बंदों की बुराई से, और शैतानों के वसवसों से और इस बात से … 4 أَعُوذُ بِوَجْهِ اللَّهِ الْكَرِيمِ وَبِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ الَّتِي ل… मैं अल्लाह की ज़ात-ए-करीम और उसके उन मुकम्मल कलिमों की पनाह माँगता हूँ जिनसे कोई नेक या बद इंसान आगे नहीं बढ़ सकता, उस बुराई से जो आसमान से … 5 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا عَمِلْتُ وَمِنْ شَرِّ مَا لَمْ أَع… ऐ अल्लाह, मैं उन कामों की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ जो मैंने किए हैं और उन कामों की बुराई से भी जो मैंने नहीं किए। 6 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ سَمْعِي وَمِنْ شَرِّ بَصَرِي وَمِنْ شَ… ऐ अल्लाह, मैं अपने कान, अपनी आँख, अपनी ज़बान और अपने दिल की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। 7 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْجُبْنِ وَالْهَرَم… ऐ अल्लाह, मैं बेबसी, सुस्ती, बुज़दिली, बुढ़ापे और कंजूसी से तेरी पनाह माँगता हूँ, और मैं क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह माँगता हूँ, और ज़िंदगी … 8 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ النَّارِ وَعَذَابِ النَّارِ، وَمِنْ… ऐ अल्लाह, मैं आग के फ़ितने और आग के अज़ाब से, और दौलतमंदी व ग़रीबी की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। 9 اللَّهُمَّ أَحْسِنْ عَاقِبَتَنَا فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا وَأَجِرْنَا مِنْ خِزْيِ… ऐ अल्लाह, हमारे तमाम मामलों का अंजाम बेहतर फरमा, और हमें दुनिया की रुसवाई और आख़िरत के अज़ाब से बचा। 10 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ كُلِّ دَابَّةٍ أَ… ऐ अल्लाह! मैं अपने नफ़्स के शर से और हर उस जानदार के शर से तेरी पनाह माँगता हूँ जिसकी पेशानी तेरे हाथ में है। बेशक मेरा रब सीधे रास्ते पर है… 11 اللَّهُمَّ احْفَظْنِي بِالْإِسْلَامِ قَائِمًا وَاحْفَظْنِي بِالْإِسْلَامِ قَاعِد… ऐ अल्लाह, मेरी इस्लाम के साथ हिफ़ाज़त फ़रमा जब मैं खड़ा रहूँ, मेरी इस्लाम के साथ हिफ़ाज़त फ़रमा जब मैं बैठा रहूँ, मेरी इस्लाम के साथ हिफ़ाज़… 12 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ زَوَالِ نِعْمَتِكَ وَتَحَوُّلِ عَافِيَتِكَ و… ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ तेरी नेमत के छिन जाने से, तेरी दी हुई आफ़ियत के बदल जाने से, तेरे अचानक आने वाले अज़ाब से और तेरी हर तरह क… 13 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبَرَصِ وَالْجُنُونِ وَالْجُذَامِ وَمِنْ س… ऐ अल्लाह, मैं सफ़ेद दाग (बरस), दीवानगी, कोढ़ और तमाम बुरी बीमारियों से तेरी पनाह माँगता हूँ। 14 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبُخْلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ وَأَ… ऐ अल्लाह, मैं कंजूसी से तेरी पनाह माँगता हूँ, बुज़दिली से तेरी पनाह माँगता हूँ और इससे भी पनाह माँगता हूँ कि मैं निकम्मी और लाचार उम्र (बुढ़… 15 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَالْهَرَمِ وَالْمَأْثَمِ وَالْمَغ… ऐ अल्लाह, मैं सुस्ती, बुढ़ापे, गुनाह और कर्ज़ के बोझ से तेरी पनाह माँगता हूँ। 16 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْفَقْرِ وَالْقِلَّةِ وَالذِّلَّةِ ऐ अल्लाह! मैं मोहताजी, कमी और ज़िल्लत से तेरी पनाह माँगता हूँ। 17 أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमों की पनाह माँगता हूँ उसकी तमाम मख़लूक़ात की बुराई से। 18 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِوَجْهِكَ الْكَرِيمِ وَكَلِمَاتِكَ التَّامَّاتِ مِنْ … ऐ अल्लाह! मैं तेरी ज़ात-ए-करीम और तेरे मुकम्मल कलिमात के ज़रिए हर उस चीज़ की बुराई से तेरी पनाह चाहता हूँ जिसकी पेशानी तूने थाम रखी है। 19 اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي وَآمِنْ رَوْعَاتِي ऐ अल्लाह! मेरे ऐबों को छुपा ले और मेरी घबराहटों को अमन दे। 20 اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ وَمِنْ خَلْفِي وَعَنْ يَمِينِي وَعَنْ … ऐ अल्लाह! मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा—मेरे सामने से और मेरे पीछे से, मेरे दाएँ से और मेरे बाएँ से, और मेरे ऊपर से। और मैं तेरी अज़मत की पनाह चाहता ह… 21 بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا… अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, और वह सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है। 22 اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ الَّذِينَ تَوَكَّلُوا عَلَيْكَ فَكَفَيْتَهُمْ ऐ अल्लाह! मुझे उन लोगों में शामिल कर जिन्होंने तुझ पर भरोसा किया और तू उनके लिए काफ़ी हो गया। 23 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ مُنْكَرَاتِ الْأَخْلَاقِ وَالْأَعْمَالِ وَال… ऐ अल्लाह! मैं बुरे अख़्लाक़ (व्यवहार), बुरे कामों, बुरी इच्छाओं और बुरी बीमारियों से तेरी पनाह माँगता हूँ। 24 اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِنَا وَآمِنْ رَوْعَاتِنَا ए अल्लाह, हमारे ऐबों को छुपा ले और हमारी घबराहटों को सुकून में बदल दे। 25 اللَّهُمَّ إِنَّا نَعُوذُ بِكَ مِنْ جَهْدِ الْبَلَاءِ وَدَرَكِ الشَّقَاءِ وَسُوء… ए अल्लाह, हम तेरी पनाह माँगते हैं मुश्किल आज़माइशों से, बदबख़्ती की मार से, बुरे फैसले से और दुश्मनों के हँसने (यानी उनकी खुशी) से। 26 اللَّهُمَّ اكْفِنَا شَرَّ الْأَشْرَارِ وَكَيْدَ الْفُجَّارِ ऐ अल्लाह! हमें शरारती लोगों के शर और बदकारों की चालों से बचा। 27 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبُخْلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ وَأَ… ऐ अल्लाह, मैं कंजूसी, बुज़दिली और बुढ़ापे की लाचारी वाली उम्र से तेरी पनाह माँगता हूँ।