Qurani·قرآني
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अल्लाह, मैं अपनी आत्मा की बुराई और हर जीव की बुराई से तेरे पास शरण चाहता हूं, जि — हिफ़ाज़त

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ كُلِّ دَابَّةٍ أَنْتَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا إِنَّ رَبِّي عَلَى صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ
लिप्यंतरण: Allaahumma innee a'oodhu bika min sharri nafsee wa min sharri kulli daabbatin anta aakhidhun binaasiyatihaa inna rabbee 'alaa siraatin mustaqeem
अनुवाद: अल्लाह, मैं अपनी आत्मा की बुराई और हर जीव की बुराई से तेरे पास शरण चाहता हूं, जिसकी गतिविधियों को तू ही नियंत्रित करता है। निश्चित रूप से, मेरा मालिक सच्चे मार्ग पर है।
संदर्भ: Abu Dawud, Ahmad
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