सफ़र के अज़कार
22 दुआएं
1
اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُ أَكْبَرُ، سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ …
अल्लाह सबसे बड़ा है (3 बार)। उस पर बड़ाई हो जिसने इसे हमारे ऊपर नम्र किया और हम इसकी कोशिश से कभी प्राप्त नहीं कर सके। और हम अपने मालिक की ओ…
2
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى، وَمِنَ ا…
अल्लाह, इस यात्रा में हमसे धर्म-परायणता और तसलीम की दुआ मांगते हैं, और ऐसे कर्म जो आपको प्रसन्न करें। अल्लाह, इस यात्रा को आसान बना दे और इस…
3
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ، وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ، …
अल्लाह, मैं यात्रा का कष्ट, दृश्य की दुखद स्थिति और बुरी वापसी से आप की पनाह मांगता हूँ।
4
آيِبُونَ تَائِبُونَ عَابِدُونَ لِرَبِّنَا حَامِدُونَ
हम अपना इस्तीफा तौभी, इबादत और अपने मालिक की प्रशंसा के साथ लौटते हैं। (यात्रा से लौटते समय)
5
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
मैं अल्लाह के इन क़ुरआनी शब्दों की पवित्रता से, उसकी बनाई गयी बुरी चीज़ों से आप की शरण माँगता हूँ। (यात्रा के दौरान किसी स्थान पर रुकते समय)
6
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِل…
उस पर बड़ाई हो जिसने इसको हमारे लिए नम्र किया और हम इसकी कोशिश से प्राप्त नहीं कर सके। और हम अपने मालिक की ओर लौटेंगे। (किसी परिवहन में सवार…
7
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى
अल्लाह, इस यात्रा में हमसे धर्म-परायणता और अल्लाह का डर मांगते हैं।
8
اللَّهُمَّ اطْوِ لَنَا الْأَرْضَ وَهَوِّنْ عَلَيْنَا السَّفَرَ
अल्लाह, धरती को हमारे लिए मोड़ दे और यात्रा को आसान बना दे।
9
بِسْمِ اللَّهِ مَجْرَاهَا وَمُرْسَاهَا إِنَّ رَبِّي لَغَفُورٌ رَحِيمٌ
अल्लाह के नाम पर इसका मार्ग और इसका आश्रय है। वास्तव में, मेरा मालिक क्षमाशील और दयालु है। (जहाज पर सवार होने पर)
10
اللَّهُمَّ إِنَّا نَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمُنْقَلَبِ
अल्लाह, मैं यात्रा के कष्ट और वापसी की दुखद स्थिति से आप की पनाह माँगता हूँ।
11
اللَّهُمَّ أَنْزِلْنِي مُنْزَلًا مُبَارَكًا وَأَنْتَ خَيْرُ الْمُنْزِلِينَ
अल्लाह, मुझे एक शुभ जगह पर उतरने दो, क्योंकि आप भूमि पर लाने वालों में सबसे अच्छे हैं।
12
وَقُلْ رَبِّ أَنْزِلْنِي مُنْزَلًا مُبَارَكًا وَأَنْتَ خَيْرُ الْمُنْزِلِينَ
और कहो: मेरे मालिक, मुझे एक शुभ उतरने की जगह पर उतार दे, और आप भूमि पर लाने वालों में सबसे अच्छे हैं। (किसी जगह पहुँचते समय)
13
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي سَلَّمَنَا وَعَافَانَا وَبَلَّغَنَا
सिब्बाह है अल्लाह जिसके पास हमें सुरक्षित रखा, हमें अच्छी तरह से पाल-पोस कर हमारी मंजिल तक पहुँचाया।
14
اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَن…
अल्लाह सबसे बड़ा है (3 बार)। उस पर बड़ाई हो जिसने इसे हमारा नम्र किया, और हम इसकी कोशिश से कभी प्राप्त नहीं कर सके। और हम अपने मालिक की ओर लौ…
15
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
मैं अल्लाह के इन पूर्ण वचनों की शरण में जाता हूँ, उसकी बनाई बुरी चीज़ों से। (यात्रा के दौरान किसी स्थान पर रुकते समय)
16
اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ اللَّهُمَّ …
अल्लाह, इस यात्रा को आसान बना दे और इसकी दूरी को कम कर दे। आप हमारी साथी हैं और हमारे परिवार का संरक्षक हैं।
17
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
मैं अल्लाह के इन पूर्ण वचनों की शरण में जाता हूँ, उसकी बनाई बुरी चीज़ों से। (यात्रा के दौरान किसी भी जगह पर रुकते समय)
18
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَوْدِعُكَ أَهْلِي وَمَالِي وَذُرِّيَّتِي وَخَوَاتِيمَ أَع…
अल्लाह, मैं अपने परिवार, धन, संतान और हमारे कर्मों का समर्पण आप के हवाले करता हूँ। (यात्रा शुरू करते समय)
19
أَسْتَوْدِعُكُمُ اللَّهَ الَّذِي لَا تَضِيعُ وَدَائِعُهُ
मैं तुम्हें अल्लाह के हवाले करता हूँ, जिसका विश्वास कभी खोता नहीं। (विदाई के समय यात्रा करने वालों से)
20
أَسْتَوْدِعُ اللَّهَ دِينَكَ وَأَمَانَتَكَ وَخَوَاتِيمَ عَمَلِكَ
मैं तुम्हारे धर्म, विश्वास और कर्मों का समर्पण अल्लाह को करता हूँ। (विदाई दुआ)
21
اللَّهُمَّ اكْتُبْ لَنَا السَّلَامَةَ فِي السَّفَرِ وَالْغَنِيمَةَ وَالسَّعَادَة…
अल्लाह, हमें यात्रा में सुरक्षा, लाभ, खुशी और ज्ञान का फैसला दे।
22
اللَّهُمَّ اطْوِ لَنَا الْأَرْضَ وَهَوِّنْ عَلَيْنَا السَّفَرَ
अल्लाह, धरती को हमारे लिए मोड़ दे और इस यात्रा को आसान बना दे।