Qurani·قرآني
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मग़फ़िरत

35 दुआएं

1 رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنْفُسَنَا وَإِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُون… ऐ हमारे रब, हमने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया है, और अगर तूने हमें माफ़ न किया और हम पर रहम न किया, तो हम यकीनन घाटा उठाने वालों में से हो जाएँ… 2 رَبِّ اغْفِرْ لِي وَتُبْ عَلَيَّ إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ ऐ मेरे रब, मुझे माफ़ कर दे और मेरी तौबा कबूल फरमा, बेशक तू ही तौबा कबूल करने वाला और निहायत रहम करने वाला है। 3 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ، دِقَّهُ وَجِلَّهُ، وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ… ऐ अल्लाह, मेरे तमाम गुनाह माफ़ फरमा दे — छोटे भी और बड़े भी, पहले के भी और बाद के भी, ज़ाहिर भी और पोशीदा भी। 4 اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي ऐ अल्लाह, बेशक तू बहुत माफ़ करने वाला है और माफ़ करने को पसंद करता है, लिहाज़ा मुझे माफ़ कर दे। 5 رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِي أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَا… ऐ हमारे रब, हमारे गुनाह माफ़ फरमा और हमारे कामों में हमारी ज़्यादतियों को दरगुज़र कर, हमारे कदम जमाए रख और काफिरों की कौम पर हमारी मदद फरमा। 6 رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا… ऐ हमारे रब, हमें और हमारे उन भाइयों को माफ़ फरमा जो हमसे पहले ईमान लाए हैं, और हमारे दिलों में ईमान वालों के लिए कोई बुग्ज़ (कीना) न रहने दे… 7 رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي فَاغْفِرْ لِي ऐ मेरे रब, मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया है, लिहाज़ा मुझे माफ़ फरमा दे। 8 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي خَطِيئَتِي وَجَهْلِي وَإِسْرَافِي فِي أَمْرِي وَمَا أَنْت… ऐ अल्लाह, मेरी गलतियां, मेरी नादानी, मेरे कामों में मेरी ज़्यादतियां और वे सब गुनाह माफ़ फरमा जिनके बारे में तू मुझसे बेहतर जानता है। 9 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ، وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَع… ऐ अल्लाह, मेरे वे सब गुनाह माफ़ कर दे जो मैंने पहले किए और जो बाद में किए, जो मैंने छिपाकर किए और जो ज़ाहिर में किए, जिसमें मैंने ज़्यादती क… 10 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَغْفِرُكَ لِكُلِّ ذَنْبٍ يَصْرِفُ عَنِّي وَجْهَكَ الْكَرِ… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हर उस गुनाह की माफ़ी चाहता हूँ जो तेरी ज़ाते करीम को मुझसे फेर दे। 11 أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ وَأَتُو… मैं अल्लाह से माफ़ी मांगता हूँ, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और पूरी कायनात को थामने वाला है, और मैं उसी की तरफ़ रुज… 12 سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَسْت… पाक है तू ऐ अल्लाह, और तमाम तारीफें तेरे ही लिए हैं। मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, मैं तुझसे माफ़ी मांगता हूँ और तेरी तरफ़… 13 اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ و… ऐ अल्लाह! तू ही मेरा रब है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तूने ही मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ, और मैं अपनी ताक़त के मुताबिक़ तेरे अहद और… 14 سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ سُبْحَانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ अल्लाह पाकीज़ा है अपनी खूबियों के साथ, अल्लाह पाकीज़ा है जो बहुत अज़मत वाला है। 15 رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا … ऐ हमारे रब! हमारे गुनाह माफ़ फ़रमा दे, हमारी बुराइयों को हमसे दूर कर दे और हमें नेक लोगों के साथ मौत अता फ़रमा। 16 رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِنْ نَسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ… ऐ हमारे रब! अगर हम भूल जाएँ या हमसे ख़ता हो जाए तो हमारी पकड़ न करना। ऐ हमारे रब! हम पर ऐसा बोझ न डाल जैसा तूने हमसे पहले लोगों पर डाला था। … 17 رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِنْ نَسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا ऐ हमारे रब, अगर हम भूल जाएँ या हमसे कोई चूक (ग़लती) हो जाए, तो हमारी पकड़ न करना। 18 رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا … ऐ हमारे रब! हमारे गुनाह माफ़ फ़रमा दे, हमारी बुराइयों को हमसे दूर कर दे और हमें नेक लोगों के साथ मौत अता फ़रमा। 19 رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ ऐ हमारे रब, हम ईमान ले आए, पस हमारे गुनाहों को बख़्श दे और हमें आग (जहन्नम) के अज़ाब से बचा ले। 20 رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا و… ऐ हमारे रब, तूने हर चीज़ को अपनी रहमत और इल्म से घेर रखा है, पस उन्हें बख़्श दे जिन्होंने तौबा की और तेरे रास्ते पर चले, और उन्हें जहन्नम के… 21 أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ وَأَتُو… मैं अल्लाह से माफ़ी मांगता हूँ, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और पूरी कायनात को थामने वाला है, और मैं उसी की तरफ़ रुज… 22 رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي فَاغْفِرْ لِي ऐ मेरे रब, मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया है, लिहाज़ा मुझे माफ़ फरमा दे। 23 اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي ऐ अल्लाह, बेशक तू बहुत माफ़ करने वाला है और माफ़ करने को पसंद करता है, लिहाज़ा मुझे माफ़ कर दे। 24 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذُنُوبِي كُلَّهَا دِقَّهَا وَجِلَّهَا وَأَوَّلَهَا وَآخِر… ऐ अल्लाह! मेरे तमाम गुनाहों को माफ़ कर दे—छोटे भी और बड़े भी, पहले के भी और बाद के भी, ज़ाहिर (खुले) भी और पोशीदा (छिपे) भी। 25 اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِ… ऐ अल्लाह! मैंने अपनी जान पर बहुत ज़्यादा ज़ुल्म किया है, और तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ नहीं कर सकता। पस तू अपनी तरफ़ से मेरी मग़्फ़िरत फ़… 26 أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ और उसी की तरफ़ तौबा करता हूँ। 27 رَبِّ اغْفِرْ لِي وَتُبْ عَلَيَّ إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ ऐ मेरे रब, मुझे माफ़ कर दे और मेरी तौबा कबूल फरमा, बेशक तू ही तौबा कबूल करने वाला और निहायत रहम करने वाला है। 28 رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي فَاغْفِرْ لِي فَغَفَرَ لَهُ إِنَّهُ هُوَ الْغَفُور… ऐ मेरे रब, बेशक मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया है, लिहाज़ा मुझे माफ़ कर दे—तो अल्लाह ने उसे माफ़ कर दिया। बेशक वह बड़ा माफ़ करने वाला, निहायत… 29 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْ… ऐ अल्लाह! मेरे उन तमाम गुनाहों को माफ़ कर दे जो मैं पहले कर चुका हूँ और जो मैंने बाद में किए, जो मैंने छुपाकर किए और जो खुलेआम किए, और जिनमे… 30 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ دِقَّهُ وَجِلَّهُ وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ ऐ अल्लाह! मेरे तमाम गुनाह माफ़ फ़रमा दे— छोटे भी और बड़े भी, पहले भी और पिछले भी। 31 أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ وَأَتُو… मैं अल्लाह से माफ़ी मांगता हूँ, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और पूरी कायनात को थामने वाला है, और मैं उसी की तरफ़ रुज… 32 اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ كَرِيمٌ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنَّا ऐ अल्लाह! बेशक तू माफ़ करने वाला और करीम है, तू माफ़ करने को पसंद करता है, लिहाज़ा हमें माफ़ कर दे। 33 اللَّهُمَّ اغْسِلْ خَطَايَايَ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ ऐ अल्लाह! मेरे गुनाहों को पानी, बर्फ़ और ओलों से धो डाल। 34 اللَّهُمَّ لَا تَحْرِمْنَا خَيْرَ مَا عِنْدَكَ بِشَرِّ مَا عِنْدَنَا ऐ अल्लाह, हमारी बुराइयों की वजह से हमें अपनी उन भलाइयों से महरूम न कर जो तेरे पास हैं। 35 رَبِّ اغْفِرْ لِي خَطِيئَتِي وَجَهْلِي وَإِسْرَافِي فِي أَمْرِي وَمَا أَنْتَ أَع… ऐ मेरे रब! मेरी गलतियों, मेरी नादानी, मेरे कामों में मेरी ज़्यादती और उन चीज़ों को माफ कर दे जिन्हें तू मुझसे बेहतर जानता है।