अल्लाह, मेरी उन गलतियों को माफ़ कर दो जो मैंने पहले और बाद में की, मेरी छुपाई और — मग़फ़िरत
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ، وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ، وَمَا أَسْرَفْتُ، وَمَا أَنْتَ أَعْلَمُ بِهِ مِنِّي، أَنْتَ الْمُقَدِّمُ وَأَنْتَ الْمُؤَخِّرُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ
लिप्यंतरण: Allaahummagh-fir lee maa qaddamtu wa maa akhkhart, wa maa asrartu wa maa a'lant, wa maa asraft, wa maa anta a'lamu bihi minnee, antal-muqaddimu wa antal-mu'akhkhiru laa ilaaha illaa ant
अनुवाद: अल्लाह, मेरी उन गलतियों को माफ़ कर दो जो मैंने पहले और बाद में की, मेरी छुपाई और बताई, मेरे अधमाई और उनसे, जिन्हें आप मुझसे बेहतर जानते हैं। आप ही हैं जो आगे बढ़ाते हैं और पीछे रखते हैं। तुम्हारे सिवा कोई उपास्य नहीं।
संदर्भ: Bukhari 8:168, Muslim 1:534