Qurani·قرآني
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अल्लाह, मैं तुझसे पूछता हूँ, ऐ अल्लाह, तू ही एक मात्र, आत्मनिर्भर है, न तो वह जन — नमाज़ के बाद के अज़कार

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا اللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ أَنْ تَغْفِرَ لِي ذُنُوبِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
लिप्यंतरण: Allaahumma innee as'aluka yaa Allaahu bi-annaka al-waahidul-ahadus-samadulladhee lam yalid wa lam yoolad wa lam yakun lahu kufuwan ahad an taghfira lee dhunoobi innaka antal-ghafoorur-raheem
अनुवाद: अल्लाह, मैं तुझसे पूछता हूँ, ऐ अल्लाह, तू ही एक मात्र, आत्मनिर्भर है, न तो वह जन्म देता है और न ही जन्म लिया है, और उसके जैसी कोई तुलना नहीं है — मेरे गुनाह माफ़ कर दे, क्यों कि तू सबसे अधिक क्षमाशील और दयालु है।
संदर्भ: Abu Dawud, An-Nasa'i
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