Qurani·قرآني
हिन्दी

इसी के बिना कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका साझी नहीं। उसका अधिकार है और उसकी — नमाज़ के बाद के अज़कार

لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، اللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ
लिप्यंतरण: Laa ilaaha illallaahu wahdahu laa shareeka lah, lahul-mulku wa lahul-hamdu wa huwa 'alaa kulli shay'in qadeer. Allaahumma laa maani'a limaa a'tayt, wa laa mu'tiya limaa mana't, wa laa yanfa'u dhal-jaddi minkal-jadd
अनुवाद: इसी के बिना कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका साझी नहीं। उसका अधिकार है और उसकी प्रशंसा। वह सब कुछ कर सकता है। अल्लाह के सिवा कोई शक्ति या बल नहीं। कोई उपास्य नहीं मगर अल्लाह, और हम उसकी ही पूजा करते हैं। उसके लिए सारी अनुकंपा, सारी कृपा और सारी सुंदर प्रशंसा है।
संदर्भ: Bukhari 1:255, Muslim 593
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