Qurani·قرآني
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अल्लाह के सिवा कोई पूजा का हकदार नहीं है। उसी का राज्य और उसकी प्रशंसा है। वह जी — नमाज़ के बाद के अज़कार

لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
लिप्यंतरण: Laa ilaaha illallaahu wahdahu laa shareeka lah, lahul-mulku wa lahul-hamdu yuhyee wa yumeetu wa huwa 'alaa kulli shay'in qadeer
अनुवाद: अल्लाह के सिवा कोई पूजा का हकदार नहीं है। उसी का राज्य और उसकी प्रशंसा है। वह जीवन देता है और मृत्यु करता है और वह सबकुछ कर सकता है। (मगरिब और फजर के बाद विशेष रूप से — 10 बार)
दोहराएं: 10 बार
संदर्भ: Tirmidhi 5:515
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