Qurani·قرآني
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मैं तुझमें से, ऐ अल्लाह, दोज़ख की सज़ा, कब्र का दर्द, जिंदगी और मौत की परीक्षाएँ — नमाज़ के बाद के अज़कार

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ
लिप्यंतरण: Allahumma inni a'udhu bika min 'adhabi Jahannam, wa min 'adhabil-qabr, wa min fitnatil-mahya wal-mamat, wa min sharri fitnatil-masihid-dajjal
अनुवाद: मैं तुझमें से, ऐ अल्लाह, दोज़ख की सज़ा, कब्र का दर्द, जिंदगी और मौत की परीक्षाएँ, और झूठे मसीहा की बुरी परीक्षाओं से शरण माँगता हूँ।
संदर्भ: Sahih Muslim 588
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