नमाज़ के बाद के अज़कार
46 दुआएं
1
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
मैं अल्लाह की माफी माँगता हूँ।
×3
2
اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ…
हे अल्लाह, तू शांति है और तुझसे ही शांति आती है। तू मालिक है, महिमा और सम्मान का।
3
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
इसी के बिना कोई उपास्य नहीं, वह अकेला है, उसका साझी नहीं। उसका अधिकार है और उसकी प्रशंसा। वह सब कुछ कर सकता है। अल्लाह के सिवा कोई शक्ति या …
4
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
महिमा है अल्लाह की।
5
سُبْحَانَ اللَّهِ
सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए।
×33
6
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अल्लाह ही सबसे बड़ा है।
×33
7
اللَّهُ أَكْبَرُ
कोई उपास्य नहीं मगर अल्लाह, उसके बिना साझी नहीं, उसका अधिकार है और वह सब कर सकता है। (99 तस्बीह के बाद 100 पूरा करने के लिए कहा गया)
×33
8
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
आयत अल-क़ुरसी (2:255) हर فرض نماز के बाद पढ़ें — केवल मृत्यु ही आपको स्वर्ग में प्रवेश से रोकती है।
9
آيَةُ الْكُرْسِيِّ
सभी नमाज़ के बाद सूरह अल-इख्लास पढ़ें।
10
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ
सभी नमाज़ के बाद सूरह अल-फलक पढ़ें।
11
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ
सभी नमाज़ के बाद सूरह अन-नस पढ़ें।
12
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ
हे अल्लाह, मेरी मदद कर मुझे तेरा स्मरण रखना, तेरा आभार व्यक्त करना, और तुझे अच्छे से पूजा करना।
13
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
हे अल्लाह, मैं तुझ में से डर, कंजूसी, बूढ़ेपन में लौटने, और इस दुनिया के फंदों से शरण चाहता हूँ, और मक़तल के आज़माइशों से भी।
14
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبُخْلِ، وَ…
मेरे मालिक, मुझे अपने सज़ा से बचा जब तू अपने बंदों को पुनः जी उठाएगा।
15
رَبِّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ
हे अल्लाह, मुझे मेरे सभी गुनाह माफ़ कर दे — छोटे और बड़े, पहले और आखिरी, सार्वजनिक और गुप्त।
16
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ، دِقَّهُ وَجِلَّهُ، وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ…
हे अल्लाह, मुझे दफ़्न की सज़ा, आग की सज़ा, जीवन और मृत्यु के फ़ने और झूठे मसीहा (जालिम) की परीक्षा से शरण दो।
17
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ و…
O Allah, I seek refuge in You from the punishment of the grave, from the punishment of Hellfire, from the trials of life and death, and from…
18
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
अल्लाह के सिवा कोई पूजा का हकदार नहीं है। उसी का राज्य और उसकी प्रशंसा है। वह जीवन देता है और मृत्यु करता है और वह सबकुछ कर सकता है। (मगरिब …
×10
19
سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَل…
तुम्हारे प्रभु की महिमा हो, सम्मान के स्वामी, उस से ऊपर जो वे वर्णन करते हैं। और पैगंबरों पर सलाम हो। और अल्लाह की तारीफ है, विश्व का स्वामी…
20
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ و…
अल्लाह, मैं तुझमें से दोजख की सजा, कब्र की सजा, जिंदगी और मौत के परिक्षणों, और झूठे मसीहा की बुरी परीक्षाओं से शरण माँगता हूँ।
21
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا اللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَد…
अल्लाह, मैं तुझसे पूछता हूँ, ऐ अल्लाह, तू ही एक मात्र, आत्मनिर्भर है, न तो वह जन्म देता है और न ही जन्म लिया है, और उसके जैसी कोई तुलना नहीं…
22
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي وَاهْدِنِي وَعَافِنِي وَارْزُقْنِي
अल्लाह, मुझे माफ कर, मुझ पर रहम कर, मुझे मार्ग दिखा, मेरी भलाई कर, और मेरी ज़िंदगी आसान बना।
23
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ
अल्लाह, मैं तुझसे स्वर्ग माँगता हूँ और आग से शरण चाहता हूँ। (हर फरिज़ी नमाज़ के बाद)
×3
24
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي وَاهْدِنِي وَعَافِنِي وَارْزُقْنِي
अल्लाह, मुझे माफ कर, मुझपर रहम कर, मुझे मार्ग दिखा, मेरी भलाई कर, और मेरी ज़िंदगी आसान बना।
25
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ
अल्लाह, मैं तुझसे स्वर्ग माँगता हूँ और आग से शरण चाहता हूँ। (हर नमाज़ के बाद 3 बार)
×3
26
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا اللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَد…
अल्लाह, मैं तुझसे, ऐ अल्लाह, एक मात्र, स्वयंपूर्ण, न तो वह जन्म देता है और न ही जन्म लिया है, और उसके जैसी कोई तुलना नहीं है — मेरे गुनाह मा…
27
سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِي…
तुम्हारे भगवान, सम्मान के मालिक, उस से ऊपर जो वे वर्णन करते हैं, की महिमा हो। पैगंबरों पर शांति हो। और अल्लाह की महात्मा, विश्व के स्वामी, क…
28
سُبْحَانَ اللَّهِ
अल्लाह की महिमा हो। (नमाज़ के बाद 33 बार — तस्बीह)
×33
29
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अल्लाह की तारीफ हो। (नमाज़ के बाद 33 बार — तहमीद)
×33
30
اللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाह ही सबसे बड़ा है। (नमाज़ के बाद 33 बार — तकबीर, कुल मिलाकर 99) फिर तहलील कहें ताकि 100 हो जाएं।
×33
31
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَم…
अल्लाह के साथ कोई साझेदार नहीं, केवल वही खुदा है। उसकी ही सत्तां है और उसकी ही महिमा है। वह सबकुछ कर सकता है। (100वीं दुआ — यानि दिक्र पूरी …
32
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَ…
हर फरिज़ी नमाज़ के बाद सूरह-अल-इख्लास पढ़ें।
33
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
हर फरिज़ी नमाज़ के बाद सूरह-अल-फलक पढ़ें।
34
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ مَلِكِ النَّاسِ
हर फरिज़ी नमाज़ के बाद सूरह-अन-नास पढ़ें।
35
آيَةُ الْكُرْسِيِّ (اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ)
हर नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ें (कुरान 2:255)। जो इसे हर नमाज़ के बाद पढ़ता है, उसे केवल मृत्यु ही परलोक में प्रवेश से रोक सकती है।
36
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
अल्लाह, मेरी मदद कर मुझे याद रखने, धन्यवाद देने, और अच्छा इबादत करने की कृपा कर। (मुआज्ज़ का दुआ — हर नमाज़ के बाद)
37
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَم…
कोई ईश्वर नहीं, केवल अल्लाह ही, उसका साझेदार नहीं। उसकी ही सत्ता है और उसकी ही प्रशंसा है। वह सबकुछ कर सकता है। ऐ अल्लाह, जो भी तू देता है, …
38
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ
अल्लाह परतम पैगंबर मोहम्मद और उनके परिवार पर दुआ करें। (तशाहुद के बाद)
39
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا وَرِزْقًا طَيِّبًا وَعَمَلًا مُتَق…
अल्लाह, मैं तुझसे लाभकारी ज्ञान, नेक हाली, और स्वीकृत कर्म चाहताहूँ। (फज्र की नमाज के बाद)
40
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
अल्लाह, मैं तुझसे तेरे इनाम की माँग करता हूँ।
41
اللَّهُمَّ يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ
ऐ अल्लाह, दिलों को घूमाने वाले, मेरे दिल को अपने धर्म पर स्थिर कर।
42
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر…
अल्लाह मेरे लिये काफी है। उसके सिवा कोई ईश नहीं है। उसमें ही मेरी भरोसा है, और वही शानदार सिंहासन का स्वामी है।
43
اللَّهُمَّ تَقَبَّلْ صَلَاتِي وَصِيَامِي وَقِيَامِي وَرُكُوعِي وَسُجُودِي
अल्लाह, मेरी नमाज़, उपवास, खड़ा होना, रुकना और रुककर सजदा करने को स्वीकार कर।
44
اللَّهُمَّ لَا تَجْعَلْهَا آخِرَ صَلَاةٍ صَلَّيْتُهَا
हे अल्लाह, यह मेरी आखिरी नमाज़ न बन जाए।
45
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
अल्लाह, मेरी याददाश्त को मजबूत बनाओ, मुझे धन्यवाद देना सिखाओ, और अच्छा इबादत करने की तकलीफ़ दो।
46
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ و…
मैं तुझमें से, ऐ अल्लाह, दोज़ख की सज़ा, कब्र का दर्द, जिंदगी और मौत की परीक्षाएँ, और झूठे मसीहा की बुरी परीक्षाओं से शरण माँगता हूँ।