Qurani·قرآني
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नमाज़ के बाद के अज़कार

46 दुआएं

1 أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ। ×3 2 اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ… ऐ अल्लाह, तू ही सलामती वाला है और तेरी ही तरफ से सलामती है, तू बड़ी बरकत वाला है, ऐ अज़मत और बुजुर्गी वाले। 3 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ… अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी की बादशाहत है और उसी के लिए तमाम तारीफें हैं और वह हर चीज़ पर कुदरत रखता … 4 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ… अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी की बादशाहत है और उसी के लिए तमाम तारीफें हैं और वह हर चीज़ पर कुदरत रखता … 5 سُبْحَانَ اللَّهِ सुब्हान अल्लाह (अल्लाह हर ऐब से पाक है) ×33 6 الْحَمْدُ لِلَّهِ अलहम्दुलिल्लाह (तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं) ×33 7 اللَّهُ أَكْبَرُ अल्लाह सबसे बड़ा है ×33 8 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ… अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं। सारी बादशाही उसी की है और प्रशंसा भी उसी की है, और वह हर चीज़ पर… 9 آيَةُ الْكُرْسِيِّ हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ें—मौत के अलावा कोई भी चीज़ आपको जन्नत में जाने से नहीं रोक सकती। 10 قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ हर नमाज़ के बाद सूरह अल-इख़लास पढ़ें। 11 قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ हर नमाज़ के बाद सूरह अल-फ़लक़ पढ़ें। 12 قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ हर नमाज़ के बाद सूरह अन-नास पढ़ें। 13 اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ ऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र, अपने शुक्र और अपनी बेहतरीन इबादत में मेरी मदद फ़रमा। 14 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبُخْلِ، وَ… ऐ अल्लाह! मैं बुज़दिली से तेरी पनाह चाहता हूँ, और कंजूसी से तेरी पनाह चाहता हूँ, और इस बात से तेरी पनाह चाहता हूँ कि मैं निकम्मी उम्र (अत्यध… 15 رَبِّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ ऐ मेरे रब! मुझे अपने अज़ाब से बचा ले, जिस दिन तू अपने बंदों को दोबारा ज़िंदा करेगा। 16 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ، دِقَّهُ وَجِلَّهُ، وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ… ऐ अल्लाह! मेरे तमाम गुनाह माफ़ फ़रमा—चाहे वो छोटे हों या बड़े, पहले हों या पिछले, ज़ाहिर हों या छुपे हुए। 17 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ و… ऐ अल्लाह! मैं क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह चाहता हूँ, और जहन्नम के अज़ाब से, और ज़िंदगी व मौत के फ़ितनों से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने के शर (… 18 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ… अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी की बादशाही है और उसी के लिए तमाम तारीफ़ें हैं, वही ज़िन्दगी देता… ×10 19 سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ ۝ وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَل… आपका रब पाक है, जो इज़्ज़त का मालिक है उन बातों से जो ये लोग बयान करते हैं। और तमाम रसूलों पर सलाम हो। और तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जो… 20 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ و… ऐ अल्लाह! मैं जहन्नम के अज़ाब से तेरी पनाह चाहता हूँ, और क़ब्र के अज़ाब से, और ज़िंदगी व मौत के फ़ितनों से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने के शर स… 21 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا اللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَد… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मांगता हूँ, ऐ अल्लाह! क्योंकि तू ही अकेला और यकता है, बे-नियाज़ है, जिसने न किसी को जना और न वह किसी से जना गया, और उसके… 22 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي وَاهْدِنِي وَعَافِنِي وَارْزُقْنِي ऐ अल्लाह! मुझे माफ़ कर दे, मुझ पर रहम फ़रमा, मुझे हिदायत दे, मुझे आफियत (सुख-शांति) अता फ़रमा और मुझे रिज़्क़ दे। 23 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत का सवाल करता हूँ और जहन्नम की आग से तेरी पनाह माँगता हूँ। ×3 24 اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي وَاهْدِنِي وَعَافِنِي وَارْزُقْنِي ऐ अल्लाह! मुझे माफ़ कर दे, मुझ पर रहम फ़रमा, मुझे हिदायत दे, मुझे आफियत (सुख-शांति) अता फ़रमा और मुझे रिज़्क़ दे। 25 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत का सवाल करता हूँ और जहन्नम की आग से तेरी पनाह माँगता हूँ। ×3 26 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا اللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَد… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मांगता हूँ, ऐ अल्लाह! क्योंकि तू ही अकेला और यकता है, बे-नियाज़ है, जिसने न किसी को जना और न वह किसी से जना गया, और उसके… 27 سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِي… आपका रब पाक है, जो इज़्ज़त का मालिक है उन बातों से जो ये लोग बयान करते हैं। और तमाम रसूलों पर सलाम हो। और तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जो… 28 سُبْحَانَ اللَّهِ सुब्हान अल्लाह (अल्लाह हर ऐब से पाक है) ×33 29 الْحَمْدُ لِلَّهِ अलहम्दुलिल्लाह (तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं) ×33 30 اللَّهُ أَكْبَرُ अल्लाह सबसे बड़ा है ×33 31 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَم… अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं। सारी बादशाही उसी की है और प्रशंसा भी उसी की है, और वह हर चीज़ पर… 32 قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ۝ اللَّهُ الصَّمَدُ ۝ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ۝ وَلَ… कह दीजिए: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बे-नियाज़ (सबके लिए सहारा और सबका मक़सूद) है। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है। और उसके बराबर का… 33 قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ۝ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ सूरह अल-फ़लक़ पढ़ें — सोने से पहले हथेलियों पर फूंकें और पूरे बदन पर मलें। 34 قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ۝ مَلِكِ النَّاسِ सूरह अन-नास पढ़ें — सोने से पहले हथेलियों पर फूंकें और पूरे बदन पर मलें। 35 آيَةُ الْكُرْسِيِّ (اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ) अल्लाह, जिसके सिवा कोई माबूद (पूज्य) नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और सबको संभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में… 36 اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ ऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र, अपने शुक्र और अपनी बेहतरीन इबादत में मेरी मदद फ़रमा। 37 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَم… अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी की बादशाहत है और उसी के लिए तमाम तारीफें हैं और वह हर चीज़ पर कुदरत रखता … 38 اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ ऐ अल्लाह! मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उनकी आल (परिवार) पर रहमतें नाज़िल फ़रमा। 39 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا وَرِزْقًا طَيِّبًا وَعَمَلًا مُتَق… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा देने वाले इल्म, पाकीज़ा रिज़्क़ और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ। 40 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल (अनुग्रह) का सवाल करता हूँ। 41 اللَّهُمَّ يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ ऐ अल्लाह! ऐ दिलों को फेरने वाले, मेरे दिल को अपने दीन पर साबित-क़दम रख। 42 حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر… मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं, मैंने उसी पर भरोसा किया और वही महान अर्श (सिंहासन) का रब है। 43 اللَّهُمَّ تَقَبَّلْ صَلَاتِي وَصِيَامِي وَقِيَامِي وَرُكُوعِي وَسُجُودِي ऐ अल्लाह! मेरी नमाज़, मेरे रोज़े, मेरा क़ियाम, मेरा रुकू और मेरा सजदा क़बूल फ़रमा। 44 اللَّهُمَّ لَا تَجْعَلْهَا آخِرَ صَلَاةٍ صَلَّيْتُهَا ऐ अल्लाह! इसे मेरी आखिरी नमाज़ न बना जो मैंने पढ़ी है। 45 اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ ऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र, अपने शुक्र और अपनी बेहतरीन इबादत में मेरी मदद फ़रमा। 46 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ و… ऐ अल्लाह! मैं जहन्नम के अज़ाब से तेरी पनाह चाहता हूँ, और क़ब्र के अज़ाब से, और ज़िंदगी व मौत के फ़ितनों से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने के शर स…