गौरव और प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है। (100 बार — पाप माफ़ हो जाते हैं जैसे समुद्र — सुबह के अज़कार
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ، سُبْحَانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ
लिप्यंतरण: SubhanAllahi wa bihamdihi, SubhanAllahil-'Azeem
अनुवाद: गौरव और प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है। (100 बार — पाप माफ़ हो जाते हैं जैसे समुद्र की बुलबुले।)
दोहराएं: 10 बार
संदर्भ: Sahih al-Bukhari 6406