Qurani·قرآني
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सुबह के अज़कार

78 दुआएं

1 أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَهَ إِلَّا… हमने सुबह की और सारी बादशाही अल्लाह ही की है, और सब प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है। अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका क… 2 اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا، وَبِكَ أَمْسَيْنَا، وَبِكَ نَحْيَا، وَبِكَ نَمُوتُ،… ऐ अल्लाह! तेरी ही तौफ़ीक़ से हमने सुबह की और तेरी ही तौफ़ीक़ से हमने शाम की, और तेरे ही हुक्म से हम जीते हैं और तेरे ही हुक्म से हम मरते हैं… 3 اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ،… ऐ अल्लाह! तू ही मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। तूने ही मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी ताक़त के मुताबिक़ तेरे अ… 4 سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ अल्लाह अपनी प्रशंसा के साथ पाक है। ×100 5 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ… अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं। सारी बादशाही उसी की है और प्रशंसा भी उसी की है, और वह हर चीज़ पर… ×10 6 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، اللَّهُمَ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में आफ़ियत (सलामती) माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे अपने दीन, अपनी दुनिया, अपने परिवार और अपने माल में … 7 اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي، وَآمِنْ رَوْعَاتِي ऐ अल्लाह! मेरे ऐबों को छुपा ले और मेरी घबराहटों को सुकून में बदल दे। 8 اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ، وَمِنْ خَلْفِي، وَعَنْ يَمِينِي، وَعَ… ऐ अल्लाह! मेरी हिफ़ाज़त फरमा—मेरे सामने से, मेरे पीछे से, मेरे दाएँ से, मेरे बाएँ से और मेरे ऊपर से। और मैं तेरी अज़मत (बड़ाई) की पनाह माँगत… 9 اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ، ر… ऐ अल्लाह! छिपे और खुले के जानने वाले, आसमानों और ज़मीन के पैदा करने वाले, हर चीज़ के रब और मालिक! मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत … 10 بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا… अल्लाह के नाम से, जिसके नाम की बरकत से ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, और वह सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है। ×3 11 رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا، وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا، وَبِمُحَمَّدٍ ﷺ نَبِيًّا मैं अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के नबी होने पर राज़ी हूँ। ×3 12 يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ، أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ، و… ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले! ऐ सबको संभालने वाले! मैं तेरी रहमत के ज़रिये तुझसे मदद माँगता हूँ। मेरे तमाम कामों को दुरुस्त कर दे और मुझे पलक झप… 13 أَصْبَحْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ، وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ، وَعَلَى … हमने सुबह की इस्लाम की फ़ितरत पर, इख़्लास (तौहीद) के कलिमे पर, हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दीन पर और हमारे पिता इब्राहीम… 14 اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ، وَمَلَائِك… ऐ अल्लाह! मैंने सुबह की, मैं तुझे गवाह बनाता हूँ और तेरे अर्श को उठाने वाले फ़रिश्तों, तेरे तमाम फ़रिश्तों और तेरी पूरी मख़्लूक़ को गवाह बना… ×4 15 اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ و… ऐ अल्लाह! आज सुबह मुझे या तेरी मख़्लूक़ में से किसी को भी जो नेमत मिली है, वह सिर्फ़ तेरी तरफ़ से है, तेरा कोई साझीदार नहीं। पस सारी प्रशंसा… 16 حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر… मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं, मैंने उसी पर भरोसा किया और वही महान अर्श (सिंहासन) का रब है। ×7 17 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُت… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा देने वाले इल्म, पाकीज़ा रिज़्क़ और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ। 18 أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ और उसी की तरफ़ तौबा करता हूँ। ×100 19 أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमों के ज़रिए उसकी पैदा की हुई तमाम चीज़ों की बुराई से पनाह माँगता हूँ। ×3 20 اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَى نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ ऐ अल्लाह! हमारे नबी मुहम्मद (ﷺ) पर अपनी रहमतें और सलामती नाज़िल फ़रमा। ×10 21 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ… अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी की बादशाही है और उसी के लिए तमाम तारीफ़ें हैं, वही ज़िन्दगी देता… ×10 22 سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ، عَدَدَ خَلْقِهِ، وَرِضَا نَفْسِهِ، وَزِنَةَ عَرْ… अल्लाह अपनी हम्द (तारीफ़) के साथ पाक है, उसकी मख़्लूक़ की तादाद के बराबर, उसकी अपनी रज़ा के मुताबिक़, उसके अर्श के वज़न के बराबर और उसके कलि… ×3 23 قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ۝ اللَّهُ الصَّمَدُ ۝ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ۝ وَلَ… कह दीजिए: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बे-नियाज़ (सबके लिए सहारा और सबका मक़सूद) है। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है। और उसके बराबर का… ×3 24 قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ۝ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ ۝ وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِ… कह दीजिए: मैं पनाह माँगता हूँ सुबह के रब की। हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की। और अंधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए। और गिरहों में फ… ×3 25 قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ۝ مَلِكِ النَّاسِ ۝ إِلَهِ النَّاسِ ۝ مِنْ شَرِّ ا… कह दीजिए: मैं पनाह माँगता हूँ इंसानों के रब की। इंसानों के बादशाह की। इंसानों के माबूद की। पीछे हट जाने वाले वसवसा डालने वाले (शैतान) की बुर… ×3 26 آيَةُ الْكُرْسِيِّ: اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَ… अल्लाह, उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह ज़िन्दा और सबको संभालने वाला है। उसे न ऊँघ आती है न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है … 27 لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ गुनाहों से बचने की हिम्मत और नेकी करने की ताक़त अल्लाह ही की मदद से है। ×10 28 سُبْحَانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ وَبِحَمْدِهِ अल्लाह जो अज़ीम है, अपनी तमाम खूबियों के साथ पाक है। ×10 29 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में आफ़ियत (भलाई और सलामती) का सवाल करता हूँ। 30 اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي سَمْعِي، اللَّهُمَّ عَا… ऐ अल्लाह! मेरे बदन में मुझे आफ़ियत दे, ऐ अल्लाह! मेरे सुनने (कानों) में मुझे आफ़ियत दे, ऐ अल्लाह! मेरी आँखों में मुझे आफ़ियत दे, तेरे सिवा क… ×3 31 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَة… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में माफ़ी और सलामती (आफ़ियत) का सवाल करता हूँ। 32 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكُفْرِ وَالْفَقْرِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ ع… ऐ अल्लाह! मैं कुफ़्र और मोहताजी (फ़क़्र) से तेरी पनाह माँगता हूँ, और क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह माँगता हूँ। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नह… ×3 33 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ، وَبِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقُوبَ… ऐ अल्लाह! मैं तेरी रज़ा के ज़रिए तेरी नाराज़गी से पनाह माँगता हूँ, और तेरी माफ़ी के ज़रिए तेरी सज़ा से पनाह माँगता हूँ। मैं तुझसे तेरी ही पन… 34 سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْ… अल्लाह हर ऐब से पाक है, तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं, अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और अल्लाह सबसे बड़ा है। ×10 35 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ… अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए तमाम तारीफ़ें हैं। वही ज़िंदा करता है और वही… ×10 36 اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ مِنْكَ فِي نِعْمَةٍ وَعَافِيَةٍ وَسِتْرٍ، فَأَتِمَّ… ऐ अल्लाह! मेरी सुबह इस हाल में हुई कि मुझ पर तेरी नेमतें, आफ़ियत और परदापोशी (ऐबों का छुपाना) है, लिहाज़ा तू दुनिया और आख़िरत में अपनी नेमतो… ×3 37 الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَقَالَنِي عَثْرَتِي وَأَقَالَ عَثَرَاتِ الْمُسْلِمِين… तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने मेरी लग़्ज़िशों (ग़लतियों) को माफ़ फ़रमाया और मुसलमानों की लग़्ज़िशों को माफ़ फ़रमाया। 38 يَا رَبِّ لَكَ الْحَمْدُ كَمَا يَنْبَغِي لِجَلَالِ وَجْهِكَ وَلِعَظِيمِ سُلْطَان… ऐ मेरे रब! तेरे लिए वैसी ही तारीफ़ है जैसी तेरी ज़ात की अज़मत और तेरी सल्तनत की बड़ाई के लायक़ है। 39 اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِمَّنْ تَوَكَّلَ عَلَيْكَ فَكَفَيْتَهُ وَاسْتَهْدَاكَ فَه… ऐ अल्लाह! मुझे उन लोगों में शामिल फ़रमा जिन्होंने तुझ पर भरोसा किया तो तू उनके लिए काफ़ी हो गया, जिन्होंने तुझसे हिदायत माँगी तो तूने उन्हें… 40 اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ فَمِنْكَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ ऐ अल्लाह! आज सुबह मुझे जो भी नेमत मिली है, वह सिर्फ़ तेरी तरफ़ से है, तेरा कोई शरीक नहीं। 41 اللَّهُمَّ مَتِّعْنِي بِسَمْعِي وَبَصَرِي وَاجْعَلْهُمَا الْوَارِثَ مِنِّي ऐ अल्लाह! मुझे मेरे सुनने और देखने की सलाहियत से फ़ायदा उठाने दे और इन्हें मेरे आख़िरी वक़्त तक बाक़ी रख। 42 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत का सवाल करता हूँ और जहन्नम की आग से तेरी पनाह माँगता हूँ। ×3 43 اللَّهُمَّ آتِ نَفْسِي تَقْوَاهَا وَزَكِّهَا أَنْتَ خَيْرُ مَنْ زَكَّاهَا أَنْتَ… ऐ अल्लाह! मेरे नफ़्स को तक़वा अता फ़रमा और इसे पाक कर दे, तू ही इसे सबसे बेहतर पाक करने वाला है। तू ही इसका सरपरस्त और मालिक है। 44 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ حُبَّكَ وَحُبَّ مَنْ يُحِبُّكَ وَحُبَّ عَمَلٍ يُقَر… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी मोहब्बत माँगता हूँ, और उन लोगों की मोहब्बत जो तुझसे मोहब्बत करते हैं, और ऐसे अमल की मोहब्बत जो मुझे तेरी मोहब्बत के… 45 اللَّهُمَّ اجْعَلْ خَيْرَ عُمْرِي آخِرَهُ وَخَيْرَ عَمَلِي خَوَاتِمَهُ وَخَيْرَ … ऐ अल्लाह! मेरी उम्र का बेहतरीन हिस्सा उसका आख़िरी हिस्सा बना, और मेरे आमाल में सबसे बेहतरीन अमल मेरे आख़िरी आमाल बना, और मेरे दिनों में सबसे… 46 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْ… ऐ अल्लाह! मैं चिंता और शोक से, लाचारी और आलस्य से, कायरता और कंजूसी से, और क़र्ज़ के बोझ व लोगों के दबाव से तेरी पनाह चाहता हूँ। 47 اللَّهُمَّ بَارِكْ لِي فِي يَوْمِي هَذَا ऐ अल्लाह! मेरे आज के इस दिन में बरकत अता फ़रमा। 48 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الصِّحَّةَ وَالْعَافِيَةَ وَالْأَمَانَةَ وَحُسْنَ ا… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे स्वास्थ्य, कुशलता (आफ़ियत), अमानतदारी, उत्तम चरित्र और तक़दीर पर प्रसन्न रहने का सवाल करता हूँ। 49 اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي أَخْشَاكَ كَأَنِّي أَرَاكَ أَبَدًا حَتَّى أَلْقَاكَ ऐ अल्लाह! मेरे दिल में अपना ऐसा डर पैदा कर दे जैसे कि मैं तुझे देख रहा हूँ, यहाँ तक कि मैं तुझसे जा मिलूँ। 50 حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر… मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं, मैंने उसी पर भरोसा किया और वही महान अर्श (सिंहासन) का रब है। ×7 51 سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ عَدَدَ خَلْقِهِ وَرِضَا نَفْسِهِ وَزِنَةَ عَرْشِه… अल्लाह अपनी हम्द (तारीफ़) के साथ पाक है, उसकी मख़्लूक़ की तादाद के बराबर, उसकी अपनी रज़ा के मुताबिक़, उसके अर्श के वज़न के बराबर और उसके कलि… ×3 52 أَصْبَحْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ وَعَلَى دِ… हमने सुबह की इस्लाम की फ़ितरत पर, इख़्लास (तौहीद) के कलिमे पर, हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दीन पर और हमारे पिता इब्राहीम… 53 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِأَنَّ لَكَ الْحَمْدَ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ الْ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे माँगता हूँ इस आधार पर कि तमाम प्रशंसा तेरे ही लिए है, तेरे सिवा कोई माबूद (पूज्य) नहीं, तू बहुत देने वाला है, आसमानों और… 54 اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَى نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ ऐ अल्लाह! हमारे नबी मुहम्मद (ﷺ) पर अपनी रहमतें और सलामती नाज़िल फ़रमा। ×10 55 اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ أَمْسَيْنَا وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ وَإ… ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम से हमने सुबह की और तेरे ही नाम से हमने शाम की, तेरे ही हुक्म से हम जीते हैं और तेरे ही हुक्म से मरते हैं और तेरी ही ओर… 56 اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ و… ऐ अल्लाह! आज सुबह मुझे या तेरी मख़्लूक़ में से किसी को भी जो नेमत मिली है, वह सिर्फ़ तेरी तरफ़ से है, तेरा कोई साझीदार नहीं। पस सारी प्रशंसा… 57 اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَ… ऐ अल्लाह! छिपे और खुले के जानने वाले, आसमानों और ज़मीन के पैदा करने वाले, हर चीज़ के रब और मालिक! मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत … 58 بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا… अल्लाह के नाम से, जिसके नाम की बरकत से ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, और वह सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है। ×3 59 رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا وَبِمُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَ… मैं अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के नबी होने पर प्रसन्न और संतुष्ट हूँ। ×3 60 أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमों के ज़रिए उसकी पैदा की हुई तमाम चीज़ों की बुराई से पनाह माँगता हूँ। ×3 61 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذَا الْيَوْمِ فَتْحَهُ وَنَصْرَهُ وَنُورَه… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस दिन की भलाई का सवाल करता हूँ: इसकी सफलता, इसकी मदद, इसका नूर, इसकी बरकत और इसकी हिदायत। और मैं तेरी पनाह चाहता हूँ इस… 62 اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ لَ… ऐ अल्लाह! आसमानों और ज़मीन को पैदा करने वाले, छिपे और प्रकट के जानने वाले! तेरे सिवा कोई माबूद (पूज्य) नहीं, तू ही हर चीज़ का रब और मालिक है। 63 اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنْ عِبَادِكَ الصَّالِحِينَ الَّذِينَ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِ… ऐ अल्लाह! मुझे अपने उन नेक बंदों में शामिल कर दे जिन्हें न कोई डर होगा और न वे दुखी होंगे। 64 لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَم… अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं। सारी बादशाही उसी की है और प्रशंसा भी उसी की है, और वह हर चीज़ पर… ×100 65 سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ अल्लाह अपनी प्रशंसा के साथ पाक है। ×100 66 أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ और उसी की तरफ़ तौबा करता हूँ। ×100 67 لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ गुनाहों से बचने की हिम्मत और नेकी करने की ताक़त अल्लाह ही की मदद से है। ×10 68 اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِب… ऐ अल्लाह, मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर रहमतें नाज़िल फ़रमा, जिस तरह तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर रहमतें नाज़िल फ़रमाईं। बेशक, त… ×10 69 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तेरे बड़े फ़ज़्ल का सवाल करता हूँ। 70 يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ وَل… ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले! ऐ सबको संभालने वाले! मैं तेरी रहमत के ज़रिये तुझसे मदद माँगता हूँ। मेरे तमाम कामों को दुरुस्त कर दे और मुझे पलक झप… ×3 71 اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُنْشِدُكَ بِمَا أَنْشَدَكَ بِهِ حَمَلَةُ عَرْشِكَ … ऐ अल्लाह, मैंने सुबह की है और मैं तुझसे वही दुआ करता हूँ जो तेरे अर्श को उठाने वालों, तेरे फ़रिश्तों, तेरे नबियों और तेरे रसूलों ने तुझसे की… 72 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ صِدْقَ التَّوَكُّلِ عَلَيْكَ وَحُسْنَ الظَّنِّ بِكَ ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तुझ पर सच्चे तवक्कुल और तेरे बारे में अच्छे गुमान का सवाल करता हूँ। 73 اللَّهُمَّ اجْعَلْ يَوْمِي هَذَا خَيْرَ يَوْمٍ عِشْتُهُ ऐ अल्लाह, मेरे इस दिन को मेरी ज़िंदगी का सबसे बेहतरीन दिन बना दे। 74 اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي حُسْنَ الْخَاتِمَةِ ऐ अल्लाह, मुझे हुस्न-ए-ख़ातिमा (अच्छे अंत) की नेमत अता फ़रमा। 75 اللَّهُمَّ إِنِّي أُحِبُّكَ وَأُحِبُّ مَنْ يُحِبُّكَ وَأُحِبُّ كُلَّ عَمَلٍ يُقَ… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे मोहब्बत करता हूँ, और उस शख़्स से मोहब्बत करता हूँ जो तुझसे मोहब्बत करता है, और हर उस अमल से मोहब्बत करता हूँ जो मुझे तेर… 76 سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ، سُبْحَانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ अल्लाह पाक है और उसकी तारीफ है, अल्लाह पाक है जो बहुत बड़ा है। ×10 77 لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ न कोई ताकत है और न कुव्वत, मगर अल्लाह की मदद से, जो बहुत बुलंद और बड़ा है। ×10 78 رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَنْ يَحْضُ… ऐ मेरे रब, मैं शैतानों के वसवसों से तेरी पनाह मांगता हूँ, और ऐ मेरे रब, मैं तेरी पनाह मांगता हूँ कि वे मेरे पास आएं।