सुबह के अज़कार
78 दुआएं
1
أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَهَ إِلَّا…
हमें सुबह में प्रवेश किया है और राज्य अल्लाह का है। प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है। कोई रब नहीं है बल्कि अकेले अल्लाह है, जिसका कोई साझेदार नही…
2
اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا، وَبِكَ أَمْسَيْنَا، وَبِكَ نَحْيَا، وَبِكَ نَمُوتُ،…
अल्लाह, तेरे द्वारा ही हम सुबह करते हैं, और तेरے द्वारा ही हम शाम करते ہیں, तेरے द्वारा ही हम जीवन और मौत पाते हैं, और तेरے ही पास है पुनरुत…
3
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ،…
अल्लाह, तु ही मेरा रब है। कोई ईश्वर नहीं बल्कि तू। तूने मुझे बनाया और मैं तेरा सेवक हूँ। मैं तेरے वचन और वादा पर हूँ जितना मैं कर सकता हूँ। …
4
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
महिमा और प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है।
×100
5
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
कोई रब नहीं है बल्कि केवल अल्लाह है, जिसका कोई साझेदार नहीं है। उसी का है राज्य, उसी की प्रशंसा है, और वही सब कुछ कर सकता है।
×10
6
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، اللَّهُمَ…
ओ अल्लाह, मैं तुझसे इस दुनिया और आने वाली दुनिया में भलाई मांगता हूँ। मैं तुझसे अपने धर्म, दुनिया के मामलों, परिवार और दौलत में माफ़ी और भला…
7
اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي، وَآمِنْ رَوْعَاتِي
ओ अल्लाह, मेरी गलतियों को छुपा दे और मेरे डर को शांत कर दे।
8
اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ، وَمِنْ خَلْفِي، وَعَنْ يَمِينِي، وَعَ…
ओ अल्लाह, मेरी आगे, मेरी पीछे, मेरी दाहिनी, मेरी बाएँ, ऊपर से, और मैं तेरी महानता से शरण मांगता हूँ कि मुझे नीचे से चुरा लिया जाए।
9
اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ، ر…
ओ अल्लाह, अज्ञात और ज्ञात का ज्ञाता, आकाशों और पृथ्वी का सर्जक, सबका रब और शासक, मैं गवाही देता हूँ कि कोई रब नहीं है बल्कि तू। मैं शरण चाहत…
10
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا…
अल्लाह के नाम से, जिनके नाम से कुछ भी धरती या आकाश में नुकसान नहीं पहुंचता, और वही सुनने वाला और जानने वाला है।
×3
11
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا، وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا، وَبِمُحَمَّدٍ ﷺ نَبِيًّا
मैं अल्लाह से संतुष्ट हूँ, मेरे रब के रूप में, इस्लाम मेरे धर्म के रूप में, और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मेरे नबी के रूप में।
×3
12
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ، أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ، و…
हे जीवन वाले, हे स्व-संपोषक, मैं अपनी मदद तेरा दया से चाहता हूँ। मेरे सभी मामले ठीक कर दे, और मुझे अपनी ही तरफ न छोड़।
13
أَصْبَحْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ، وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ، وَعَلَى …
हम सुबह कर चुके हैं इस स्वाभाविक इस्लाम के धर्म पर, सच्चाई के वचन पर, आपके पैगंबर मोहम्मद के धर्म पर, और हमारे पिता इब्राहीम की उम्मत पर — स…
14
اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ، وَمَلَائِك…
अल्लाह, मैंने सुबह कर लिया है और मैं तुझसे, तेरा सिंहासन उठाने वाले, तेरे फरिश्तों और सारी तेरी सृष्टि से गवाही देने का अनुरोध करता हूँ कि त…
×4
15
اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ و…
अल्लाह, जो भी आशीर्वाद मैं या तेरी किसी रचना ने इस सुबह में पाया है, वह केवल तेरा है और तेरा ही है। इसलिए तुम्हारे लिए सारी प्रशंसा है और ते…
16
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر…
अल्लाह मेरे लिए ही पर्याप्त है। कोई ईश्वर नहीं बल्कि वही। मैंने अपनी भरोसा उसकी ही तरफ किया है, और वही महाशक्तिशाली सिंहासन का रब है।
×7
17
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُت…
अल्लाह से मैं लाभकारी ज्ञान, अच्छे प्रावधान और स्वीकार किए गए कर्म चाहता हूँ।
18
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
मैं अल्लाह से माफी चाहता हूँ और उसकी तरफ तौबा करता हूँ।
×100
19
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
मैं अल्लाह के पूर्ण वाक्यों में से refuge चाहता हूँ, उनके द्वारा बनाए गए बुराई से।
×3
20
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَى نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ
ओ अल्लाह, हमारे पैगंबर मोहम्मद पर अपनी सलामत और अपनी बरकतें भेज।
×10
21
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
कोई रब नहीं है बल्कि केवल अल्लाह है, जिसका कोई साझेदार नहीं है। उसी का है राज्य और प्रशंसा। वह जीवन देता है और मृत्यु करता है, और वही जीवित …
×10
22
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ، عَدَدَ خَلْقِهِ، وَرِضَا نَفْسِهِ، وَزِنَةَ عَرْ…
महिमा और प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जैसे उसकी वस्तुओं की संख्या के समान, जितना उसे प्रिय हो, उसकी सिंहासन के वजन जितना, और उसकी बात के स्य…
×3
23
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَ…
कहो: वह है अल्लाह, एकमात्र। अल्लाह, स्वावलंबी। न वह जन्म देता है, न उसे जन्म दिया गया है। और उसकी तुलना में कोई नहीं है। (सूरह अल-इख़लास)
×3
24
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِ…
कहो: मैं सुबह के रब से refuge चाहता हूँ। उसकी बनाई हुई बुरी बातों से। अंधेरी रात की बुरी बातों से। जो गाँठें सूतते हैं, उनकी बुरी बातों से। …
×3
25
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ مَلِكِ النَّاسِ إِلَهِ النَّاسِ مِنْ شَرِّ ا…
कहो: मैं इंसानों के रब से refuge चाहता हूँ। इंसानों का स्वामित्व करने वाले, इंसानों का ईश्वर। उस वफादार की बुरी बातों से जो दिलों में फुसफुस…
×3
26
آيَةُ الْكُرْسِيِّ: اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَ…
आयत अल-क़ुरसी (कुरान 2:255): अल्लाह — उसके सिवा कोई पूजा योग्य नहीं, जीवित और स्थायी। न उसे नींद आती है, न वह सोता है। उसके पास है जो आकाशों…
27
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
अल्लाह के सिवा कोई शक्ति नहीं है।
×10
28
سُبْحَانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ وَبِحَمْدِهِ
महिमा और प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, सर्व शक्तिमान।
×10
29
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ
ओ अल्लाह, मैं तुझसे इस दुनिया और आने वाली दुनिया में भलाई मांगता हूँ।
30
اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي سَمْعِي، اللَّهُمَّ عَا…
ओ अल्लाह, मुझे मेरे शरीर में भलाई देना, सुनने में भलाई देना, देखने में भलाई देना। तेरा कोई साथी नहीं है।
×3
31
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَة…
ओ अल्लाह, मैं तुझे माफ़ी और इस दुनिया और आख़रत में भलाई का निवेदन करता हूँ।
32
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكُفْرِ وَالْفَقْرِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ ع…
ओ अल्लाह, मैं तुझसे पाप और गरीबी से refuge चाहता हूँ, और क़ब्र के दंड से। तेरा कोई साथी नहीं है।
×3
33
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ، وَبِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقُوبَ…
ओ अल्लाह, मैं तेरे प्रसन्नता से तेरे क्रोध से refuge चाहता हूँ, तेरे माफ़ी से तेरे दंड से। मैं तुझसे refuge चाहता हूँ, क्योंकि मैं तेरा ही प…
34
سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْ…
महिमा अल्लाह ही के लिए है, प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, कोई ईश्वर नहीं बल्कि अल्लाह, और अल्लाह सबसे बड़ा है।
×10
35
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
कोई भी ईश्वर नहीं है बल्कि अकेले अल्लाह है, जिसका कोई साझेदार नहीं। उसी का है राज और प्रशंसा। वह जीवन देता है और मौत करता है, और वही जीवित ह…
×10
36
اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ مِنْكَ فِي نِعْمَةٍ وَعَافِيَةٍ وَسِتْرٍ، فَأَتِمَّ…
ओ अल्लाह, मैंने सुबह भलाई, आराम और अपने गुनाहों से छुपाव के साथ की है, तो अपनी कृपा मुझे पूरी कर दे, अपनी भलाई और अपने गुप्तता को इस दुनिया …
×3
37
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَقَالَنِي عَثْرَتِي وَأَقَالَ عَثَرَاتِ الْمُسْلِمِين…
महिमा है उस भगवान की जिसने मेरी गलतियों को माफ़ किया और मुसलमानों की गलतियों को भी।
38
يَا رَبِّ لَكَ الْحَمْدُ كَمَا يَنْبَغِي لِجَلَالِ وَجْهِكَ وَلِعَظِيمِ سُلْطَان…
ओ मेरे रब, तेरी शोभा और तेरा अधिकार जैसे कि तेरे मुख का सम्मान है और तेरे राज की महानता के अनुरूप प्रशंसा हो।
39
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِمَّنْ تَوَكَّلَ عَلَيْكَ فَكَفَيْتَهُ وَاسْتَهْدَاكَ فَه…
ओ अल्लाह, मुझे उन लोगों में बना दे जो तुझ पर भरोसा करते हैं, जिन्होंने तेरा सहारा चाहा और तुझे मार्गदर्शन किया, और जिनہوں نے तुझसे सहायता मा…
40
اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ فَمِنْكَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ
ओ अल्लाह, जो भी मुझे इस सुबह में blessing मिलती है वह केवल तेरे ही पास है, तेरा कोई साथी नहीं।
41
اللَّهُمَّ مَتِّعْنِي بِسَمْعِي وَبَصَرِي وَاجْعَلْهُمَا الْوَارِثَ مِنِّي
ओ अल्लाह, मुझे मेरी सुनने और देखने का आनंद दे और उन्हें मेरी अंतिम faculties बना दो जो मुझे छोड़ें।
42
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ
ओ अल्लाह, मैं तुझसे जन्नत की दुआ करता हूँ और आग से refuge चाहता हूँ।
×3
43
اللَّهُمَّ آتِ نَفْسِي تَقْوَاهَا وَزَكِّهَا أَنْتَ خَيْرُ مَنْ زَكَّاهَا أَنْتَ…
ओ अल्लाह, मेरे दिल को अपनी परहेज़गी और पवित्रता दे — तू ही सबसे अच्छा पवित्र करने वाला है। तू ही उसका रक्षक और मालिक है।
44
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ حُبَّكَ وَحُبَّ مَنْ يُحِبُّكَ وَحُبَّ عَمَلٍ يُقَر…
ओ अल्लाह, मैं तुझे अपने प्यार, तूसे प्रेम करने वालों का प्यार, और ऐसे कर्मों का प्यार चाहता हूँ जो मुझे तुझसे نزدیک करें।
45
اللَّهُمَّ اجْعَلْ خَيْرَ عُمْرِي آخِرَهُ وَخَيْرَ عَمَلِي خَوَاتِمَهُ وَخَيْرَ …
ओ अल्लाह, मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा आखिरी समय बनाओ, मेरे कर्मों का सबसे अच्छा परिणाम, और मेरे दिनों का सबसे अच्छा दिन जब मैं तुझे मिलूं।
46
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْ…
ओ अल्लाह, मैं तुझसे worry और grief से refuge चाहता हूँ, और कमजोरी, आलस्य, cowardice और मितव्ययिता से, और कर्ज और पुरुषों पर हावी होने से।
47
اللَّهُمَّ بَارِكْ لِي فِي يَوْمِي هَذَا
ओ अल्लाह, इस मेरे दिन में मेरी बरकत बढ़ा।
48
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الصِّحَّةَ وَالْعَافِيَةَ وَالْأَمَانَةَ وَحُسْنَ ا…
ओ अल्लाह, मैं तुझसे स्वास्थ्य, भलाई, विश्वास, अच्छा चरित्र, और क़िस्मत पर संतोष मांगता हूँ।
49
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي أَخْشَاكَ كَأَنِّي أَرَاكَ أَبَدًا حَتَّى أَلْقَاكَ
ओ अल्लाह, मुझे ऐसा डर दे जैसे मैं तुझे देख रहा हूँ, जब तक कि मैं तुझे मिल न जाऊँ।
50
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر…
अल्लाह मेरे लिए کافی है। कोई ईश्वर नहीं बल्कि वही। उसमें मेरी विश्वास है, और वही सिंहासन का रब है।
×7
51
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ عَدَدَ خَلْقِهِ وَرِضَا نَفْسِهِ وَزِنَةَ عَرْشِه…
अल्लाह की слав और प्रशंसा उस की خلق के जितनी बार, जितनी खुशी उससे है, उतनी भारी उसकी सिंहासन के जितनी, और जितने शब्द उसके हैं, उतने ही।
×3
52
أَصْبَحْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ وَعَلَى دِ…
हमने इस्लाम की प्राकृतिक धार्मिकता पर सुबह की है, ईमानदारी के शब्द पर, हमारे पैगंबर मुहम्मद की धर्म पर, और हमारे पिता इब्राहिम के रास्ते पर …
53
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِأَنَّ لَكَ الْحَمْدَ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ الْ…
अल्लाह, मैं तुझसे उस बात से तसली देता हूँ कि सारी प्रशंसा तेरी ही है। कोई खुदा नहीं बल्कि तू, देने वाला, आकाश और पृथ्वी का जन्म देने वाला। म…
54
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَى نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ
अल्लाह, हमारे पैगंबर मुहम्मद पर दया और सलाम भेजो।
×10
55
اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ أَمْسَيْنَا وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ وَإ…
अल्लाह, तेरे द्वारा ही हम सुबह करते हैं, तेरे द्वारा ही हम शाम करते हैं, तेरे द्वारा ही हम जीते हैं, तेरे द्वारा ही हम मरते हैं, और तुझ ही क…
56
اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ و…
अल्लाह, जो भी बदौलत मुझे या तेरी किसी भी सृष्टि को इस सुबह प्राप्त होती है, वह केवल तेरे द्वारा है, बिना किसी साझेदार के। तो तुझ ही को सभी प…
57
اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَ…
अल्लाह, अनदेखे और देखे गए ज्ञाता, आकाश और पृथ्वी के निर्माता, सभी चीजों का स्वामी और शासक। मैं गवाही देता हूँ कि कोई भी पूजा का हकदार नहीं ह…
58
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا…
अल्लाह के नाम से, जिसके नाम से पृथ्वी और स्वर्ग में कुछ भी हानि नहीं पहुँचा सकता, और वह ही सुनने वाला है, सब कुछ जानने वाला है।
×3
59
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا وَبِمُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَ…
मैं अल्लाह से अपनी रज़ा के साथ, अपने धर्म के साथ, और अपने पैगंबर मुहम्मद (शांति और पर्दापण उन पर हो) के साथ संतुष्ट हूँ।
×3
60
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
मैं तेरे उन पूर्ण शब्दों से, जो तू ने भेजे, तेरे बुराई से, जो उसकी रचना है, शरण चाहता हूँ।
×3
61
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذَا الْيَوْمِ فَتْحَهُ وَنَصْرَهُ وَنُورَه…
अल्लाह, मैं तुझसे इस दिन की भलाई माँगता हूँ: इसकी शुरुआत, इसकी सहायता, इसकी रोशनी, इसकी बरकतें और हिदायत। और मैं तेरे पास इसकी बुराई और उसके…
62
اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ لَ…
अल्लाह, आकाश और पृथ्वी के निर्माता, अनदेखी और देखी गई बातों का ज्ञाता, तेरा कोई साझेदार नहीं है, सबका स्वामी और सच्चा मालिक।
63
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنْ عِبَادِكَ الصَّالِحِينَ الَّذِينَ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِ…
अल्लाह, मुझे अपने नेक बंदों में शामिल कर, जो न डरे और न ही दुखी हों।
64
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَم…
कोई भी पूजा का हकदार नहीं है लेकिन अल्लाह अकेले, बिना साझेदार के। उसका राज्य भी वही है, उसकी प्रशंसा भी वही है, और वह सब कुछ करने पर सक्षम ह…
×100
65
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
अल्लाह की Glory और praise। (100 बार — पाप माफ़ हो जाते हैं जैसे समुद्र की काई)।
×100
66
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ और उसकी तरफ तौबा करता हूँ। (100 बार रोजाना — पैगंबर ने ऐसा किया।)
×100
67
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
कोई शक्ति या ताकत नहीं है बल्कि अल्लाह के पास है। (जन्नत के खज़ाने में से एक खज़ाना।)
×10
68
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِب…
अल्लाह, मुहम्मद और मुहम्मद के घराने पर बरकत भेजो, जैसे कि तू ने इब्राहिम और उसके घराने पर भेजी। वाकई, तू प्रशंसनीय और महान है।
×10
69
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ
अल्लाह, मैं तुझसे अपनी अपार कृपा से माँगता हूँ।
70
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ وَل…
अल्लाह, जब तक जीवित हूँ, अपनी दया से मदद माँगता हूँ। मेरी सभी बातें ठीक कर दे, और मुझे अपने ही भरोसे पर न छोड़, चाहे आंख झपकाने की भी देर हो…
×3
71
اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُنْشِدُكَ بِمَا أَنْشَدَكَ بِهِ حَمَلَةُ عَرْشِكَ …
अल्लाह, मैं सुबह कर चुका हूँ और तुझ से उसी दुआ से पुकारता हूँ, जैसी तेरे सिंहासन के रखवाले, तेरे फरिश्ते, तेरे पैगंबर और तेरे दूत करते हैं।
72
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ صِدْقَ التَّوَكُّلِ عَلَيْكَ وَحُسْنَ الظَّنِّ بِكَ
अल्लाह, मैं तुझ से विश्वास की सच्चाई और तेरे अच्छे अपेक्षा की मांग करता हूँ।
73
اللَّهُمَّ اجْعَلْ يَوْمِي هَذَا خَيْرَ يَوْمٍ عِشْتُهُ
अल्लाह, मैं चाहता हूँ कि यह मेरा दिन मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन बने।
74
اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي حُسْنَ الْخَاتِمَةِ
अल्लाह, मुझे अंत में अच्छा मुक़ाम दे।
75
اللَّهُمَّ إِنِّي أُحِبُّكَ وَأُحِبُّ مَنْ يُحِبُّكَ وَأُحِبُّ كُلَّ عَمَلٍ يُقَ…
अल्लाह, मैं तुझसे प्यार करता हूँ, और जो तुझ से प्यार करता है, उससे प्यार करता हूँ, और हर वो काम जो मुझे तुझ के करीब ले जाए, उसे प्यार करता ह…
76
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ، سُبْحَانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ
गौरव और प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है। (100 बार — पाप माफ़ हो जाते हैं जैसे समुद्र की बुलबुले।)
×10
77
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ
मुझे अल्लाह की माफी माँगता हूँ और उसकी तरफ तौबा करता हूँ। (100 बार रोजाना — पैगंबर ने ऐसा किया।)
×10
78
رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَنْ يَحْضُ…
कोई शक्ति या ताकत नहीं है बल्कि अल्लाह के पास है। (यह जन्नत के खज़ाने में से है।)