Qurani·قرآني
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ऐ अल्लाह! मैं चिंता और शोक से, लाचारी और आलस्य से, कायरता और कंजूसी से, और क़र्ज़ — सुबह के अज़कार

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ وَالْبُخْلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ غَلَبَةِ الدَّيْنِ وَقَهْرِ الرِّجَالِ
लिप्यंतरण: Allaahumma innee a'oodhu bika minal-hammi wal-hazan wa a'oodhu bika minal-'ajzi wal-kasal wa a'oodhu bika minal-jubni wal-bukhl wa a'oodhu bika min ghalabatid-dayni wa qahrir-rijaal
अनुवाद: ऐ अल्लाह! मैं चिंता और शोक से, लाचारी और आलस्य से, कायरता और कंजूसी से, और क़र्ज़ के बोझ व लोगों के दबाव से तेरी पनाह चाहता हूँ।
संदर्भ: Bukhari 7:158
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