Qurani·قرآني
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कोई भी ईश्वर नहीं है बल्कि अकेले अल्लाह है, जिसका कोई साझेदार नहीं। उसी का है रा — सुबह के अज़कार

لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ حَيٌّ لَا يَمُوتُ بِيَدِهِ الْخَيْرُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
लिप्यंतरण: Laa ilaaha illallaahu wahdahu laa shareeka lah, lahul-mulku wa lahul-hamdu yuhyee wa yumeetu wa huwa hayyun laa yamootu biyadihil-khayru wa huwa 'alaa kulli shay'in qadeer
अनुवाद: कोई भी ईश्वर नहीं है बल्कि अकेले अल्लाह है, जिसका कोई साझेदार नहीं। उसी का है राज और प्रशंसा। वह जीवन देता है और मौत करता है, और वही जीवित है जो मरता नहीं। उसके पास सभी भलाई है, और वही सब कुछ कर सकता है।
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संदर्भ: Tirmidhi 5:515, Ibn Majah
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