Qurani·قرآني
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कोई भी पूजा का हकदार नहीं है लेकिन अल्लाह अकेले, बिना साझेदार के। उसका राज्य भी — सुबह के अज़कार

لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
लिप्यंतरण: Laa ilaaha illallaahu wahdahu laa shareeka lah lahul-mulku wa lahul-hamdu wa huwa 'alaa kulli shay'in qadeer
अनुवाद: कोई भी पूजा का हकदार नहीं है लेकिन अल्लाह अकेले, बिना साझेदार के। उसका राज्य भी वही है, उसकी प्रशंसा भी वही है, और वह सब कुछ करने पर सक्षम है। (100 बार — 10 गुलाम रिहा करने के बराबर, 100 अच्छे काम, 100 पाप मिट जाएँ, शैतान से रक्षा, शाम तक),
दोहराएं: 100 बार
संदर्भ: Bukhari 4:95, Muslim 4:2071
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