ओ अल्लाह, अज्ञात और ज्ञात का ज्ञाता, आकाशों और पृथ्वी का सर्जक, सबका रब और शासक, — सुबह के अज़कार
اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ، رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي، وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ
लिप्यंतरण: Allaahumma 'aalimal-ghaybi wash-shahaadah, faatiras-samaawaati wal-ard, rabba kulli shay'in wa maleekah, ash-hadu an laa ilaaha illaa ant, a'oodhu bika min sharri nafsee, wa min sharrish-shaytaani wa shirkihi
अनुवाद: ओ अल्लाह, अज्ञात और ज्ञात का ज्ञाता, आकाशों और पृथ्वी का सर्जक, सबका रब और शासक, मैं गवाही देता हूँ कि कोई रब नहीं है बल्कि तू। मैं शरण चाहता हूँ तेरे जहान की बुरी बातों से, मेरी आत्मा और शैतान और उसके साथियों की बुरी बातों से।
संदर्भ: Abu Dawud 4:317