सोने के अज़कार
41 दुआएं
1
بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
ऐ अल्लाह, तेरे ही नाम के साथ मैं मरता हूँ और जीता हूँ।
2
بِاسْمِكَ رَبِّي وَضَعْتُ جَنْبِي، وَبِكَ أَرْفَعُهُ، فَإِنْ أَمْسَكْتَ نَفْسِي …
ऐ मेरे रब, तेरे ही नाम के साथ मैंने अपना पहलू रखा और तेरी ही मदद से मैं इसे उठाऊँगा। अगर तू मेरी रूह कब्ज़ कर ले तो उस पर रहम फरमा, और अगर त…
3
اللَّهُمَّ إِنَّكَ خَلَقْتَ نَفْسِي وَأَنْتَ تَوَفَّاهَا، لَكَ مَمَاتُهَا وَمَحْ…
ऐ अल्लाह, तूने ही मेरी जान पैदा की और तू ही इसे मौत देता है। इसका मरना और जीना तेरे ही हाथ में है। अगर तू इसे ज़िंदा रखे तो इसकी हिफाज़त फरम…
4
اللَّهُمَّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ
ऐ अल्लाह, मुझे अपने अज़ाब से बचा ले, जिस दिन तू अपने बंदों को दोबारा ज़िंदा करेगा।
×3
5
اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ نَفْسِي إِلَيْكَ، وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ، وَوَجَّهْت…
ऐ अल्लाह, मैंने खुद को तेरे सुपुर्द किया, अपना मामला तुझे सौंपा, अपना रुख तेरी तरफ किया और अपनी पीठ का सहारा तुझसे लिया, तेरी तरफ रग़बत और ख…
6
سُبْحَانَ اللَّهِ
सुब्हान अल्लाह (अल्लाह हर ऐब से पाक है)
×33
7
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अलहम्दुलिल्लाह (तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं)
×33
8
اللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाह सबसे बड़ा है
×34
9
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنَا وَسَقَانَا، وَكَفَانَا وَآوَانَا، فَكَمْ م…
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें खिलाया और पिलाया, हमारी ज़रूरतों को पूरा किया और हमें ठिकाना दिया, क्योंकि कितने ही ऐसे लोग हैं ज…
10
اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَاوَاتِ السَّبْعِ وَرَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، رَبَّنَا …
ऐ अल्लाह, सातों आसमानों के रब और महान अर्श (सिंहासन) के रब, हमारे रब और हर चीज़ के रब, अनाज और गुठली को फाड़ने वाले (पैदा करने वाले), तौरात,…
11
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَ…
कह दीजिए: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बे-नियाज़ (सबके लिए सहारा और सबका मक़सूद) है। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है। और उसके बराबर का…
×3
12
آيَةُ الْكُرْسِيِّ: اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ
अल्लाह, जिसके सिवा कोई माबूद (पूज्य) नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और सबको संभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में…
13
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं, उसी की बादशाहत है और उसी के लिए तमाम तारीफ़ें हैं, और वह हर…
14
آمَنْتُ بِكِتَابِكَ الَّذِي أَنْزَلْتَ وَبِنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ
मैं तेरी उस किताब पर ईमान लाया जिसे तूने नाज़िल किया और तेरे उस नबी पर ईमान लाया जिसे तूने भेजा। (सोने से पहले के अंतिम शब्द)।
15
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
सूरह अल-फ़लक़ पढ़ें — सोने से पहले हथेलियों पर फूंकें और पूरे बदन पर मलें।
×3
16
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ مَلِكِ النَّاسِ
सूरह अन-नास पढ़ें — सोने से पहले हथेलियों पर फूंकें और पूरे बदन पर मलें।
×3
17
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَفَانِي وَآوَانِي وَأَطْعَمَنِي وَسَقَانِي وَالَّذِي …
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने मेरी ज़रूरतों को पूरा किया, मुझे ठिकाना दिया, मुझे खिलाया और पिलाया, और जिसने मुझ पर एहसान किया तो बहु…
18
اللَّهُمَّ خَلَقْتَ نَفْسِي وَأَنْتَ تَوَفَّاهَا، لَكَ مَمَاتُهَا وَمَحْيَاهَا، …
ऐ अल्लाह! तूने ही मेरी जान पैदा की और तू ही उसे मौत देगा। इसकी मौत और ज़िंदगी तेरे ही हाथ में है। अगर तू इसे जीवित रखे तो इसकी रक्षा फ़रमा, …
19
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْلَمْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ وَأَل…
ऐ अल्लाह! मैंने अपना चेहरा तेरे सुपुर्द कर दिया, अपना मामला तुझे सौंप दिया, और अपनी पीठ का सहारा तुझ पर ले लिया, तेरी रज़ा की उम्मीद और तेरे…
20
اللَّهُمَّ بِاسْمِكَ أَحْيَا وَبِاسْمِكَ أَمُوتُ
ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम के साथ मैं जीता हूँ और तेरे ही नाम के साथ मैं मरता हूँ।
21
اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَ…
ऐ अल्लाह! परोक्ष (ग़ैब) और प्रत्यक्ष को जानने वाले, आसमानों और ज़मीन को पैदा करने वाले, हर चीज़ के रब और उसके मालिक! मैं गवाही देता हूँ कि त…
22
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي وَأَخْسِئْ شَيْطَانِي وَفُكَّ رِهَانِي وَاجْعَلْن…
ऐ अल्लाह! मेरे गुनाह माफ़ फ़रमा दे, मेरे शैतान को दूर कर दे, मेरी गर्दन (गिरवी से) छुड़ा दे, और मुझे (फ़रिश्तों की) ऊँची महफ़िल में शामिल कर…
23
اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ نَفْسِي إِلَيْكَ وَوَجَّهْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ وَفَوَّضْتُ …
ऐ अल्लाह! मैंने अपनी जान तेरे सुपुर्द कर दी, अपना चेहरा तेरी ओर मोड़ लिया, अपना मामला तुझे सौंप दिया और अपनी पीठ का सहारा तुझ पर ले लिया।
24
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَفَانِي وَآوَانِي وَأَطْعَمَنِي وَسَقَانِي وَالَّذِي …
तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं जिसने मुझे किफायत की और मुझे पनाह दी, मुझे खिलाया और पिलाया, और जिसने मुझ पर एहसान किया और बहुत नवाज़ा, और जिस…
25
اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَاوَاتِ وَرَبَّ الْأَرْضِ وَرَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ رَ…
ऐ अल्लाह, आसमानों के रब, ज़मीन के रब और अर्श-ए-अज़ीम के रब, हमारे रब और हर चीज़ के रब! मैं हर उस चीज़ के शर (बुराई) से तेरी पनाह माँगता हूँ जिसक…
26
سُبْحَانَ اللَّهِ
सुब्हान अल्लाह (अल्लाह हर ऐब से पाक है)
×33
27
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अलहम्दुलिल्लाह (तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं)
×33
28
اللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाह सबसे बड़ा है
×34
29
يَسْتَتِرُ أَحَدُكُمْ بِآيَةِ الْكُرْسِيِّ فَإِنَّهُ لَنْ يَزَالَ عَلَيْهِ مِنَ …
जो कोई सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़ेगा, अल्लाह की ओर से उस पर एक हिफाज़त करने वाला मुकर्रर रहेगा और सुबह तक कोई शैतान उसके करीब नहीं आएगा।
30
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَ…
कह दीजिए: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बे-नियाज़ (सबके लिए सहारा और सबका मक़सूद) है। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है। और उसके बराबर का…
×3
31
اللَّهُمَّ بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا
ऐ अल्लाह, तेरे ही नाम के साथ मैं मरता (सोता) हूँ और जीता (जागता) हूँ।
32
اللَّهُمَّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ
ऐ अल्लाह, मुझे अपने अज़ाब से बचा ले, जिस दिन तू अपने बंदों को दोबारा ज़िंदा करेगा।
×3
33
سُبْحَانَ اللَّهِ
सुब्हान अल्लाह (अल्लाह हर ऐब से पाक है)
×33
34
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अलहम्दुलिल्लाह (तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं)
×33
35
اللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाह सबसे बड़ा है
×34
36
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِمَّنْ يَقُومُ لِصَلَاةِ الْفَجْرِ
ऐ अल्लाह, मुझे उन लोगों में शामिल कर जो फज्र की नमाज़ के लिए उठते हैं।
37
اللَّهُمَّ نَجِّنِي مِنْ عَذَابِكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ
ऐ अल्लाह, मुझे अपने अज़ाब से बचा लेना जिस दिन तू अपने बंदों को दोबारा उठाएगा।
38
اللَّهُمَّ لَكَ أَسْلَمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْكَ أَنَ…
ऐ अल्लाह, मैं तेरे ही फरमांबरदार हुआ, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया, तेरी ही तरफ रुजू किया और तेरी ही मदद से (दुश्मनों से) मुकाबला किय…
39
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي مَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ وَمَا أَخْطَأْتُ وَمَا عَ…
ऐ अल्लाह, मेरे उन गुनाहों को माफ़ कर दे जो मैंने छुपा कर किए और जो खुले आम किए, और जो मुझसे गलती से हुए और जो मैंने जानबूझकर किए।
40
اللَّهُمَّ أَيْقِظْنِي فِي أَحَبِّ السَّاعَاتِ إِلَيْكَ لِأَتَقَرَّبَ إِلَيْكَ ب…
ऐ अल्लाह, मुझे उस घड़ी में जगा जो तुझे सबसे ज़्यादा पसंद है, ताकि मैं उन कामों के ज़रिए तेरा कुर्ब हासिल कर सकूँ जो तुझे राज़ी कर दें।
41
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَالْهَرَمِ وَالْمَأْثَمِ وَالْمَغ…
ऐ अल्लाह, मैं सुस्ती, बुढ़ापे, गुनाह और कर्ज़ के बोझ से तेरी पनाह माँगता हूँ।