हे अल्लाह, स्वर्ग के स्वामी, पृथ्वी के स्वामी, शानदार सिंहासन के स्वामी, हमारा म — सोने के अज़कार
اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَاوَاتِ وَرَبَّ الْأَرْضِ وَرَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ رَبَّنَا وَرَبَّ كُلِّ شَيْءٍ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ كُلِّ ذِي شَرٍّ أَنْتَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهِ
लिप्यंतरण: Allaahumma rabbas-samaawaati wa rabbal-ardi wa rabbal-'arshil-'adheem rabbanaa wa rabba kulli shay' a'oodhu bika min sharri kulli dhee sharrin anta aakhidhun binaasiyatih
अनुवाद: हे अल्लाह, स्वर्ग के स्वामी, पृथ्वी के स्वामी, शानदार सिंहासन के स्वामी, हमारा मालिक और हर चीज़ का स्वामी — मैं तुझसे उस बुराई से शरण मांगता हूँ जिसकी तू उसी के अग्रभाग को पकड़े हुए है।
संदर्भ: Muslim 4:2084