Qurani·قرآني
हिन्दी

हे अल्लाह, तूने मेरी आत्मा को रचा है और तू ही इसे वापस लेता है। तेरा ही मृत्यु औ — सोने के अज़कार

اللَّهُمَّ إِنَّكَ خَلَقْتَ نَفْسِي وَأَنْتَ تَوَفَّاهَا، لَكَ مَمَاتُهَا وَمَحْيَاهَا، إِنْ أَحْيَيْتَهَا فَاحْفَظْهَا، وَإِنْ أَمَتَّهَا فَاغْفِرْ لَهَا، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ
लिप्यंतरण: Allaahumma innaka khalaqta nafsee wa anta tawaffaahaa, laka mamaatuhaa wa mahyaahaa, in ahyaytahaa fahfadhhaa, wa in amattahaa faghfir lahaa. Allaahumma innee as'alukal-'aafiyah
अनुवाद: हे अल्लाह, तूने मेरी आत्मा को रचा है और तू ही इसे वापस लेता है। तेरा ही मृत्यु और जीवन है। अगर तू इसे जीवन देता है, तो इसकी रक्षा कर; अगर तू इसे मौत दे, तो माफ़ कर। हे अल्लाह, मैं तुझसे भलाई माँगता हूँ।
संदर्भ: Muslim 4:2083
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