शुक्र है अल्लाह का, जिसने हमें भोजन और पेय दिया, हमें पर्याप्त किया और हमें आश्र — सोने के अज़कार
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنَا وَسَقَانَا، وَكَفَانَا وَآوَانَا، فَكَمْ مِمَّنْ لَا كَافِيَ لَهُ وَلَا مُؤْوِيَ
लिप्यंतरण: Alhamdu lillaahil-ladhee at'amanaa wa saqaanaa, wa kafaanaa wa aawaanaa, fakam mimman laa kaafiya lahu wa laa mu'wee
अनुवाद: शुक्र है अल्लाह का, जिसने हमें भोजन और पेय दिया, हमें पर्याप्त किया और हमें आश्रय दिया, उनके कितनों के पास कोई नहीं जो उनका पर्याप्त कर सके और कोई नहीं जो उनका आश्रय दे सके।
संदर्भ: Muslim 4:2083