Qurani·قرآني
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जो सोने से पहले आयत अल-क़ुरसी पढ़ता है, उसे अल्लाह का संरक्षक मिलेगा और कोई शैता — सोने के अज़कार

يَسْتَتِرُ أَحَدُكُمْ بِآيَةِ الْكُرْسِيِّ فَإِنَّهُ لَنْ يَزَالَ عَلَيْهِ مِنَ اللَّهِ حَافِظٌ وَلَا يَقْرَبُهُ شَيْطَانٌ حَتَّى يُصْبِحَ
लिप्यंतरण: Ayatul-Kursee (Quran 2:255)
अनुवाद: जो सोने से पहले आयत अल-क़ुरसी पढ़ता है, उसे अल्लाह का संरक्षक मिलेगा और कोई शैतान उससे सुबह तक नहीं आएगा।
संदर्भ: Bukhari 5:267
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