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दैनिक दुआएं

76 दुआएं

1 بِسْمِ اللَّهِ अल्लाह के नाम से। 2 الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं, जो तमाम जहानों का रब है। 3 رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَاب… ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भलाई अता फरमा और आख़िरत में भी भलाई अता फरमा, और हमें आग के अज़ाब से बचा। 4 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْهُدَى وَالتُّقَى وَالْعَفَافَ وَالْغِنَى ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हिदायत, तक़वा, पाक-दामनी और बे-नियाज़ी का सवाल करता हूँ। 5 اللَّهُمَّ أَصْلِحْ لِي دِينِي الَّذِي هُوَ عِصْمَةُ أَمْرِي، وَأَصْلِحْ لِي دُن… ऐ अल्लाह, मेरे लिए मेरे दीन को सुधार दे जो मेरे हर मामले की हिफ़ाज़त है, मेरी दुनिया को सुधार दे जिसमें मेरी गुज़र-बसर है, और मेरी आख़िरत को… 6 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ زَوَالِ نِعْمَتِكَ، وَتَحَوُّلِ عَافِيَتِكَ،… ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ तेरी नेमत के छिन जाने से, तेरी दी हुई आफ़ियत के बदल जाने से, तेरे अचानक आने वाले अज़ाब से और तेरी हर तरह क… 7 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنَ الْخَيْرِ كُلِّهِ عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ، مَا عَل… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हर तरह की भलाई का सवाल करता हूँ, चाहे वह जल्दी मिलने वाली हो या देर से, जिसे मैं जानता हूँ और जिसे मैं नहीं जानता। 8 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الشَّرِّ كُلِّهِ عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ، مَا عَ… ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ हर तरह की बुराई से, चाहे वह जल्दी आने वाली हो या देर से, जिसे मैं जानता हूँ और जिसे मैं नहीं जानता। 9 رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْك… ऐ हमारे रब, हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर दे और हमें अपने पास से रहमत अता फरमा, बेशक तू ही बड़ा अता करने वाला है। 10 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الثَّبَاتَ فِي الْأَمْرِ، وَالْعَزِيمَةَ عَلَى الرُ… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे दीन के मामले में मज़बूती और हिदायत पर साबित-क़दमी का सवाल करता हूँ। 11 يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ ऐ दिलों को फेरने वाले, मेरे दिल को अपने दीन पर साबित-क़दम रख। 12 يَا مُصَرِّفَ الْقُلُوبِ صَرِّفْ قَلْبِي عَلَى طَاعَتِكَ ऐ दिलों को फेरने वाले, मेरे दिल को अपनी इताअत की तरफ फेर दे। 13 اللَّهُمَّ أَحْسِنْ عَاقِبَتَنَا فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا، وَأَجِرْنَا مِنْ خِزْي… ऐ अल्लाह, हमारे तमाम मामलों का अंजाम बेहतर फरमा, और हमें दुनिया की रुसवाई और आख़िरत के अज़ाब से बचा। 14 رَبِّ أَوْزِعْنِي أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ الَّتِي أَنْعَمْتَ عَلَيَّ وَعَلَى وَ… ऐ मेरे रब, मुझे तौफ़ीक़ अता फरमा कि मैं तेरी उस नेमत का शुक्र अदा करूँ जो तूने मुझ पर और मेरे वालिदैन पर की है, और ऐसे नेक अमल करूँ जिनसे तू… 15 اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ ऐ अल्लाह, अपने ज़िक्र, शुक्र और बेहतरीन इबादत पर मेरी मदद फरमा। 16 رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي ۝ وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي ऐ मेरे रब! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे और मेरे लिए मेरा काम आसान कर दे। 17 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذَا الْيَوْمِ فَتْحَهُ وَنَصْرَهُ وَنُورَه… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस दिन की भलाई, इसकी कामयाबी, इसकी मदद, इसके नूर, इसकी बरकत और इसकी हिदायत का सवाल करता हूँ। 18 اللَّهُمَّ بِكَ أُحَاوِلُ وَبِكَ أُصَاوِلُ وَبِكَ أُقَاتِلُ ऐ अल्लाह! तेरी ही मदद से मैं कोशिश करता हूँ, तेरी ही मदद से मैं हमला करता हूँ और तेरी ही मदद से मैं मुकाबला करता हूँ। 19 اللَّهُمَّ أَلْهِمْنِي رُشْدِي وَأَعِذْنِي مِنْ شَرِّ نَفْسِي ऐ अल्लाह! मुझे मेरी हिदायत इल्हाम फरमा और मुझे मेरे नफ़्स की बुराई से पनाह दे। 20 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فِعْلَ الْخَيْرَاتِ وَتَرْكَ الْمُنْكَرَاتِ وَحُبَّ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नेक काम करने, बुराइयों को छोड़ने और गरीबों से मोहब्बत करने की तौफीक माँगता हूँ। 21 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا عَمِلْتُ وَمِنْ شَرِّ مَا لَمْ أَع… ऐ अल्लाह, मैं उन कामों की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ जो मैंने किए हैं और उन कामों की बुराई से भी जो मैंने नहीं किए। 22 اللَّهُمَّ مُصَرِّفَ الْقُلُوبِ صَرِّفْ قُلُوبَنَا عَلَى طَاعَتِكَ ऐ अल्लाह, दिलों को फेरने वाले! हमारे दिलों को अपनी इबादत और फरमाबरदारी की तरफ फेर दे। 23 اللَّهُمَّ آتِ نَفْسِي تَقْوَاهَا وَزَكِّهَا أَنْتَ خَيْرُ مَنْ زَكَّاهَا أَنْتَ… ऐ अल्लाह! मेरे नफ्स को उसका तक़वा (परहेजगारी) अता फरमा और इसे पाक कर दे, तू ही इसे सबसे बेहतर पाक करने वाला है। तू ही इसका वाली (सरपरस्त) और… 24 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ حُبَّكَ وَحُبَّ مَنْ يُحِبُّكَ وَحُبَّ عَمَلٍ يُقَر… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी मुहब्बत का सवाल करता हूँ, और उसकी मुहब्बत का जो तुझसे मुहब्बत करता हो, और ऐसे काम की मुहब्बत का जो मुझे तेरी मुहब्ब… 25 اللَّهُمَّ اجْعَلْ خَيْرَ عُمْرِي آخِرَهُ وَخَيْرَ عَمَلِي خَوَاتِمَهُ وَخَيْرَ … ऐ अल्लाह! मेरी उम्र का बेहतरीन हिस्सा उसका आखिरी हिस्सा बना, और मेरे बेहतरीन अमल मेरे आखिरी अमल बना, और मेरा सबसे बेहतरीन दिन वह बना जिसमें … 26 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ وَرَحْمَتِكَ فَإِنَّهُ لَا يَمْلِكُهَ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फज़्ल और तेरी रहमत का सवाल करता हूँ, क्योंकि तेरे सिवा इनका कोई और मालिक नहीं। 27 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ وَالْمُعَافَاةَ الدَّائِمَ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दीन, दुनिया और आखिरत में माफी, आफियत और मुस्तकिल सलामती का सवाल करता हूँ। 28 اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِي يَوْمِنَا هَذَا ऐ अल्लाह! हमारे लिए हमारे आज के इस दिन में बरकत अता फरमा। 29 اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي أَخْشَاكَ كَأَنِّي أَرَاكَ أَبَدًا حَتَّى أَلْقَاكَ ऐ अल्लाह! मुझे अपने से ऐसा डरा दे जैसे मैं तुझे हमेशा देख रहा हूँ, यहाँ तक कि मैं तुझसे जा मिलूँ। 30 رَبِّ أَعِنِّي وَلَا تُعِنْ عَلَيَّ وَانْصُرْنِي وَلَا تَنْصُرْ عَلَيَّ وَامْكُر… ऐ मेरे रब! मेरी मदद फ़रमा और मेरे ख़िलाफ़ (दुश्मनों की) मदद न कर, मेरी हिमायत फ़रमा और मेरे ख़िलाफ़ (किसी की) हिमायत न कर, मेरे हक़ में तदबी… 31 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعِفَّةَ وَالْغِنَى ऐ अल्लाह! मैं तुझसे पाकदामनी और बेनियाज़ी (आत्मनिर्भरता) का सवाल करता हूँ। 32 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ يَوْمِ السُّوءِ وَمِنْ لَيْلَةِ السُّوءِ وَم… ऐ अल्लाह, मैं बुरे दिन, बुरी रात, बुरी घड़ी, बुरे साथी और बुरे पड़ोसी से तेरी पनाह माँगता हूँ। 33 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مُوجِبَاتِ رَحْمَتِكَ وَعَزَائِمَ مَغْفِرَتِكَ ऐ अल्लाह, मैं तुझसे उन चीज़ों का सवाल करता हूँ जो तेरी रहमत को लाज़िम कर दें और तेरी मग़फ़िरत (बख़्शिश) का ज़रिया बनें। 34 اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي صَبُورًا وَاجْعَلْنِي شَكُورًا وَاجْعَلْنِي فِي عَيْنِي صَ… ऐ अल्लाह, मुझे बहुत सब्र करने वाला बना दे, और मुझे बहुत शुक्र करने वाला बना दे, और मेरी अपनी नज़रों में मुझे छोटा बना दे और लोगों की नज़रों … 35 اللَّهُمَّ حَبِّبْ إِلَيْنَا الْإِيمَانَ وَزَيِّنْهُ فِي قُلُوبِنَا وَكَرِّهْ إِ… ऐ अल्लाह, हमारे दिलों में ईमान को महबूब बना दे और उसे हमारे दिलों में ज़ीनत दे दे, और हमारे लिए कुफ़्र, गुनाह और नाफ़रमानी को नापसंदीदा बना … 36 اللَّهُمَّ ثَبِّتْنِي وَاجْعَلْنِي هَادِيًا مَهْدِيًّا ऐ अल्लाह! मुझे (हक़ पर) साबित क़दम रख और मुझे हिदायत देने वाला और हिदायत पाया हुआ बना। 37 اللَّهُمَّ أَصْلِحْ لِي دِينِيَ الَّذِي هُوَ عِصْمَةُ أَمْرِي وَأَصْلِحْ لِي دُن… ऐ अल्लाह, मेरे लिए मेरे दीन को सुधार दे जो मेरे हर मामले की हिफ़ाज़त है, मेरी दुनिया को सुधार दे जिसमें मेरी गुज़र-बसर है, और मेरी आख़िरत को… 38 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فِعْلَ الْخَيْرَاتِ وَتَرْكَ الْمُنْكَرَاتِ وَحُبَّ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नेक काम करने, बुराइयों को छोड़ने और मिस्कीनों (ग़रीबों) से मोहब्बत करने का सवाल करता हूँ, और ये कि तू मुझे बख़्श दे और मुझ … 39 اللَّهُمَّ اقْسِمْ لَنَا مِنْ خَشْيَتِكَ مَا يَحُولُ بَيْنَنَا وَبَيْنَ مَعَاصِي… ऐ अल्लाह! हमें अपना इतना डर अता कर जो हमारे और तेरी नाफरमानी के बीच रुकावट बन जाए, और इतनी फरमाबरदारी अता कर जिससे तू हमें अपनी जन्नत में पह… 40 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنَ الْخَيْرِ كُلِّهِ عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ مَا عَلِ… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हर तरह की भलाई का सवाल करता हूँ, चाहे वह जल्दी मिलने वाली हो या देर से, जिसे मैं जानता हूँ और जिसे मैं नहीं जानता। 41 اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ ऐ अल्लाह, अपने ज़िक्र, शुक्र और बेहतरीन इबादत पर मेरी मदद फरमा। 42 رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَاب… ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भलाई अता फरमा और आख़िरत में भी भलाई अता फरमा, और हमें आग के अज़ाब से बचा। 43 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الثَّبَاتَ فِي الْأَمْرِ وَالْعَزِيمَةَ عَلَى الرُّ… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे दीन के मामले में मज़बूती और हिदायत पर साबित-क़दमी का सवाल करता हूँ। 44 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْهُدَى وَالتُّقَى وَالْعَفَافَ وَالْغِنَى ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हिदायत, तक़वा, पाक-दामनी और बे-नियाज़ी का सवाल करता हूँ। 45 يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ ऐ दिलों को फेरने वाले, मेरे दिल को अपने दीन पर साबित-क़दम रख। 46 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में आफ़ियत (सलामती) का सवाल करता हूँ। 47 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ رِضَاكَ وَالْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ سَخَطِكَ و… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तेरी रज़ा और जन्नत का सवाल करता हूँ, और तेरी नाराज़गी और आग (जहन्नम) से तेरी पनाह माँगता हूँ। 48 اللَّهُمَّ اهْدِنَا فِيمَنْ هَدَيْتَ وَعَافِنَا فِيمَنْ عَافَيْتَ وَتَوَلَّنَا ف… ऐ अल्लाह! हमें उन लोगों में शामिल फ़रमा जिन्हें तूने हिदायत दी है, हमें उन लोगों में रख जिन्हें तूने आफ़ियत बख़्शी है, हमें उन लोगों में शाम… 49 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنَ الْخَيْرِ كُلِّهِ عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ مَا عَلِ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे हर किस्म की भलाई का सवाल करता हूँ, चाहे वो जल्द मिलने वाली हो या देर से, जिसे मैं जानता हूँ और जिसे मैं नहीं जानता। और म… 50 اللَّهُمَّ أَحْسِنْ عَاقِبَتَنَا فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا وَأَجِرْنَا مِنْ خِزْيِ… ऐ अल्लाह, हमारे तमाम मामलों का अंजाम बेहतर फरमा, और हमें दुनिया की रुसवाई और आख़िरत के अज़ाब से बचा। 51 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا وَرِزْقًا طَيِّبًا وَعَمَلًا مُتَق… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा पहुँचाने वाले इल्म, पाकीज़ा रिज़्क़ और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ। 52 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ الْمَسْأَلَةِ وَخَيْرَ الدُّعَاءِ وَخَيْرَ ا… ऐ अल्लाह, मैं तुझसे बेहतरीन सवाल, बेहतरीन दुआ, बेहतरीन सफलता, बेहतरीन अमल, बेहतरीन सवाब, बेहतरीन ज़िंदगी और बेहतरीन मौत का सवाल करता हूँ। 53 اللَّهُمَّ زَيِّنَّا بِزِينَةِ الْإِيمَانِ وَاجْعَلْنَا هُدَاةً مُهْتَدِينَ ऐ अल्लाह, हमें ईमान की ज़ीनत से सजा दे और हमें हिदायत देने वाला और खुद हिदायत पाने वाला बना। 54 اللَّهُمَّ جَنِّبْنِي مُنْكَرَاتِ الْأَخْلَاقِ وَالْأَهْوَاءِ وَالْأَعْمَالِ وَا… ऐ अल्लाह, मुझे बुरे अख़्लाक़ (आचरण), बुरी ख्वाहिशों, बुरे कामों और बुरी बीमारियों से दूर रख। 55 اللَّهُمَّ أَصْلِحْ لِي دِينِي الَّذِي هُوَ عِصْمَةُ أَمْرِي ऐ अल्लाह, मेरे लिए मेरा दीन दुरुस्त कर दे, जो मेरे हर मामले की हिफाज़त का ज़रिया है। 56 اللَّهُمَّ اجْعَلِ الْحَيَاةَ زِيَادَةً لِي فِي كُلِّ خَيْرٍ وَاجْعَلِ الْمَوْتَ… ऐ अल्लाह, ज़िंदगी को मेरे लिए हर भलाई में ज़्यादती का सबब बना दे, और मौत को मेरे लिए हर बुराई से राहत का ज़रिया बना दे। 57 اللَّهُمَّ أَحْيِنِي مَا كَانَتِ الْحَيَاةُ خَيْرًا لِي وَتَوَفَّنِي إِذَا كَانَ… ऐ अल्लाह, मुझे तब तक ज़िंदा रख जब तक जीना मेरे लिए बेहतर हो, और मुझे तब मौत दे जब मरना मेरे लिए बेहतर हो। 58 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْفِتَنِ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ ऐ अल्लाह, मैं फ़ितनों (आज़माइशों) से तेरी पनाह माँगता हूँ, चाहे वे ज़ाहिर हों या छुपे हुए। 59 اللَّهُمَّ لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُن… ऐ अल्लाह, हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न होने दे, और हमें अपने पास से रहमत अता फरमा। बेशक तू ही बहुत ज़्यादा देने वाला है। 60 اللَّهُمَّ أَعِذْنِي مِنْ شَرِّ سَمْعِي وَمِنْ شَرِّ بَصَرِي وَمِنْ شَرِّ لِسَان… ऐ अल्लाह, मैं अपने कान, अपनी आँख, अपनी ज़बान, अपने दिल और अपनी नफ़्सानी ख्वाहिश (वासना) की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। 61 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِ مَا سَأَلَكَ مِنْهُ نَبِيُّكَ مُحَمَّدٌ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे उन सब भलाइयों का सवाल करता हूँ जिनका सवाल तुझसे तेरे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने किया था, और मैं उन सब बुरा… 62 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ أَنْ تَجْعَلَ كُلَّ قَضَاءٍ قَضَيْتَهُ لِي خَيْرًا ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इल्तिजा करता हूँ कि तू मेरे हक़ में जो भी फ़ैसला करे, उसे मेरे लिए बेहतर बना दे। 63 اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِ… ऐ अल्लाह, मुझे अपने हलाल रिज़्क़ के साथ अपने हराम से बचाते हुए काफ़ी हो जा, और मुझे अपने फ़ज़्ल से अपने सिवा हर किसी से बेनयाज़ कर दे। 64 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الثَّبَاتَ فِي الْأَمْرِ وَالْعَزِيمَةَ عَلَى الرُّ… ऐ अल्लाह! मैं तुझसे हर मामले में साबित-क़दमी और हिदायत पर मज़बूती का सवाल करता हूँ, और तुझसे तेरी नेमतों के शुक्र और तेरी बेहतरीन इबादत की त… 65 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ قَلْبًا سَلِيمًا وَلِسَانًا صَادِقًا ऐ अल्लाह! मैं तुझसे क़ल्ब-ए-सलीम (पाकीज़ा दिल) और सच्ची ज़बान का सवाल करता हूँ। 66 اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا عَمِلْتُ وَشَرِّ مَا لَمْ أَعْمَلْ ऐ अल्लाह! मैं उन कामों की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ जो मैंने किए हैं, और उन कामों की बुराई से भी जो मैंने (अभी तक) नहीं किए। 67 اللَّهُمَّ أَحْسِنْ عَاقِبَتَنَا فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا ऐ अल्लाह! हमारे तमाम कामों का अंजाम बेहतर फ़रमा। 68 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فِعْلَ الْخَيْرَاتِ وَتَرْكَ الْمُنْكَرَاتِ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नेक काम करने और बुराइयों को छोड़ने का सवाल करता हूँ। 69 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ إِنَّكَ أَنْتَ الْوَهَّابُ ऐ अल्लाह! मैं तेरे अज़ीम फ़ज़्ल का सवाल करता हूँ, बेशक तू ही अता करने वाला है। 70 اللَّهُمَّ أَعُوذُ بِنُورِ وَجْهِكَ الَّذِي أَشْرَقَتْ لَهُ الظُّلُمَاتُ ऐ अल्लाह! मैं तेरे चेहरे (ज़ात) के उस नूर की पनाह चाहता हूँ जिससे तमाम अंधेरे रोशन हो जाते हैं। 71 اللَّهُمَّ بِعِلْمِكَ الْغَيْبِ وَقُدْرَتِكَ عَلَى الْخَلْقِ أَحْيِنِي مَا عَلِم… ऐ अल्लाह! अपने ग़ैब के इल्म और मख़्लूक़ पर अपनी कु़दरत के वास्ते, मुझे तब तक ज़िंदा रख जब तक तू जानता है कि ज़िंदगी मेरे लिए बेहतर है। 72 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعِزَّةَ وَالتَّمْكِينَ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इज़्ज़त और तमकनत (मज़बूती) का सवाल करता हूँ। 73 اللَّهُمَّ اجْعَلْ لَنَا مِنْ كُلِّ ضِيقٍ مَخْرَجًا وَمِنْ كُلِّ هَمٍّ فَرَجًا و… ऐ अल्लाह, हमारे लिए हर तंगी से निकलने का रास्ता बना दे, हर गम से निजात दे और हमें ऐसी जगह से रिज़्क अता फरमा जहाँ से हमें गुमान भी न हो। 74 اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي خَيْرًا مِمَّا يَظُنُّونَ وَاغْفِرْ لِي مَا لَا يَعْلَمُون… ऐ अल्लाह, मुझे उससे बेहतर बना दे जो लोग मेरे बारे में सोचते हैं, और उन गुनाहों को माफ कर दे जिन्हें वे नहीं जानते। 75 رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِنْ نَسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا ऐ हमारे रब, अगर हम भूल जाएँ या हमसे कोई चूक (ग़लती) हो जाए, तो हमारी पकड़ न करना। 76 رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِنْ … ऐ हमारे रब! हम पर ऐसा बोझ न डाल जैसा तूने हमसे पहले के लोगों पर डाला था।