अल्लाह, जो भी शुभकामनाएँ मैं या तेरी कोई भी संपूर्ण सृष्टि इस शाम को प्राप्त करत — शाम के अज़कार
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ
लिप्यंतरण: Hasbiyallaahu laa ilaaha illaa huwa 'alayhi tawakkaltu wa huwa rabbul-'arshil-'adheem
अनुवाद: अल्लाह, जो भी शुभकामनाएँ मैं या तेरी कोई भी संपूर्ण सृष्टि इस शाम को प्राप्त करती है, वह केवल तुझ ही से है, साझेदार के बिना। तो तुझ ही को प्रशंसा है, और तुझ ही का शुक्र है।
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संदर्भ: Abu Dawud 4:321