हे अल्लाह, मैं संध्या के समय को तेरा आशीर्वाद, शुभता और मेरी खामियों का पर्दा डा — शाम के अज़कार
اللَّهُمَّ إِنِّي أَمْسَيْتُ مِنْكَ فِي نِعْمَةٍ وَعَافِيَةٍ وَسِتْرٍ، فَأَتِمَّ نِعْمَتَكَ عَلَيَّ وَعَافِيَتَكَ وَسِتْرَكَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ
लिप्यंतरण: Allaahumma innee amsaytu minka fee ni'matin wa 'aafiyatin wa sitr, fa-atimma ni'mataka 'alayya wa 'aafiyataka wa sitraka fid-dunyaa wal-aakhirah
अनुवाद: हे अल्लाह, मैं संध्या के समय को तेरा आशीर्वाद, शुभता और मेरी खामियों का पर्दा डाल कर मनाता हूँ, तो अपनी कृपा पूर्ण कर, अपने वरदान और अपने संरक्षण को इस दुनिया और आखिरी तर्क में मुझे अर्पित कर।
दोहराएं: 3 बार
संदर्भ: Ibn as-Sunni 1:43