हे अल्लाह, मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और आग से शरण चाहता हूँ। — शाम के अज़कार
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ
लिप्यंतरण: Allaahumma innee as'alukal-jannata wa a'oodhu bika minan-naar
अनुवाद: हे अल्लाह, मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और आग से शरण चाहता हूँ।
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संदर्भ: Abu Dawud 2:89