शाम के अज़कार
64 दुआएं
1
أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَهَ إِلَّا …
अल्लाह, तेरे नाम से, तुझ से डरता हूँ, और तेरे नाम से शरण चाहता हूँ, कि तेरे से डर के बिना कुछ भी न हो।
2
اللَّهُمَّ بِكَ أَمْسَيْنَا، وَبِكَ أَصْبَحْنَا، وَبِكَ نَحْيَا، وَبِكَ نَمُوتُ،…
शाम का समय आया है और राज्य केवल अल्लाह का है। प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है। कोई ईश्वर नहीं बल्कि अल्लाह अकेले, बिना साझेदार के। उसका राज्य भी…
3
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ،…
अल्लाह, तेरे द्वारा ही हम शाम करते हैं, तेरे द्वारा ही सुबह करते हैं, तुझे ही हम जीते हैं, तुझे ही हम मरते हैं, और तुझ ही की तरफ लौटना है।
4
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
अल्लाह, तू मेरी खुदा है। कोई भी खुदा नहीं बल्कि तू। तू ने मुझे बनाया, और मैं तेरा सेवक हूँ। मैं तेरा वादा और करार निभाने की कोशिश कर रहा हूँ…
×100
5
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
गौरव और प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है।
×3
6
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، اللَّهُمَ…
मैं अल्लाह की सच्ची शब्दों से अपनी रक्षा करता हूँ, उससे जो उसने बनाया है, बुराई से।
7
اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي، وَآمِنْ رَوْعَاتِي
अल्लाह, मैं तुझसे इस दुनिया और आने वाले कल के लिए भलाई माँगता हूँ। हँ, मैं तुझसे क्षमा और भलाई माँगता हूँ, अपने धर्म, दुनियावी मामले, परिवार…
8
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا…
अल्लाह, मेरी खामियों को छुपा लो और मेरे डर को शांत कर दो।
×3
9
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا، وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا، وَبِمُحَمَّدٍ ﷺ نَبِيًّا
अल्लाह के नाम से, जिसके नाम से पृथ्वी और स्वर्ग में कुछ भी हानि नहीं पहुँचता, और वह सुनने वाला और जानते वाला है।
×3
10
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ، أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ، و…
मैं अल्लाह से रज़ामंद हूँ, अपने राष्ट्र, अपने धर्म और अपने पैगंबर मुहम्मद (शांति और पर्दापण उन पर हो) के साथ।
11
أَمْسَيْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ، وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ، وَعَلَى …
अल्लाह, मेरी शाम को, मैं अपने अपने अधिकारों को ठीक कर लेता हूँ, और मुझे अपने ही भरोसे पर न छोड़।
12
اللَّهُمَّ إِنِّي أَمْسَيْتُ أُشْهِدُكَ وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ، وَمَلَائِك…
हमने इस्लाम की प्राकृतिक धार्मिकता पर शाम की है, ईमानदारी के शब्द पर, हमारे पैगंबर मुहम्मद की धर्म पर, और हमारे पिता इब्राहिम के रास्ते पर —…
×4
13
اللَّهُمَّ مَا أَمْسَى بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ وَ…
अल्लाह, मैं शाम को पहुँचा हूँ और मैं तुझ से बुला रहा हूँ, तेरा सिंहासन, तेरा फरिश्ते, और तेरी सारी सृष्टि गवाह है कि तू ही अल्लाह है — कोई ख…
14
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر…
अल्लाह, जो भी शुभकामनाएँ मैं या तेरी कोई भी संपूर्ण सृष्टि इस शाम को प्राप्त करती है, वह केवल तुझ ही से है, साझेदार के बिना। तो तुझ ही को प्…
×7
15
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
अल्लाह मेरे लिए पर्याप्त है। कोई खुदा नहीं बल्कि वह। मैंने उसका भरोसा किया है, और वह ही सिंहासन का स्वामी है।
×100
16
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَى نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ
मैं अल्लाह की माफ़ी चाहता हूँ और उसकी तरफ तौबा करता हूँ।
×10
17
آيَةُ الْكُرْسِيِّ: اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ
अल्लाह, अपने पैगंबर मुहम्मद पर शांति और बरकत भेज।
18
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَ…
आयत अल-कुरसि़ (कुरान 2:255): अल्लाह — उसके सिवा कोई खुदा नहीं, वह ही जीवित है, सबके पालनहार।
×3
19
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِ…
कहो: वह अल्लाह है, एक। अल्लाह, खुदा का आधार। न वह जन्म देता है, और न ही उसका जन्म हुआ है। और उसके बराबर कोई नहीं। (सूरत अल-इख़लास)
×3
20
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ مَلِكِ النَّاسِ إِلَهِ النَّاسِ مِنْ شَرِّ ا…
कहो: मैं मॉर्निंग के स्वामी, भगवान का आश्रय लेता हूँ... (सूरत अल-फलक)
×3
21
اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ، وَمِنْ خَلْفِي، وَعَنْ يَمِينِي، وَعَ…
कहो: मैं मानव के स्वामी का आश्रय लेता हूँ... (सूरत अन-नास)
22
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
अल्लाह, मेरे आगे, पीछे, दाहिने, बाएँ, ऊपर और नीचे से मुझे सुरक्षित कर, और तेरी महानता से शरण माँगता हूँ कि मुझे नीचे से बदली में कोई भी अचान…
×10
23
اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي سَمْعِي، اللَّهُمَّ عَا…
हे अल्लाह, मुझे मेरे शरीर में स्वास्थ्य प्रदान कर, हे अल्लाह, सुनने में मुझे सुखी कर, हे अल्लाह, दृष्टि में मुझे अच्छा बना। तेरा कलाकार कोई …
×3
24
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكُفْرِ وَالْفَقْرِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ ع…
हे अल्लाह, मैं तेरे पास द्वेष और गरीबी से शरण माँगता हूँ, और कब्र की यातना से भी। तेरा कोई साझी नहीं।
×3
25
سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْ…
महा ज्ञान के लिए अल्लाह की महिमा, तारिफ तो अल्लाह के लिए है, तेरा कोई साझी नहीं, और अल्लाह सबसे महान है।
×10
26
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ وَبِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقُوبَت…
हे अल्लाह, मैं तेरे क्रोध से तेरे प्रसन्नता की शरण चाहता हूँ, तेरा दुलार से तेरे श्राप से। मैं तेरे पास तेरे ही से शरण माँगता हूँ। मैं तुझे …
27
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَ…
किसी भी पूजा का अधिकार सिर्फ अल्लाह का है, उसका कोई भागीदार नहीं। उसी का राज्य है और उसकी तारीफ। वही जीवन देता है और मृत्यु भी। वह जीवित है,…
×10
28
اللَّهُمَّ إِنِّي أَمْسَيْتُ مِنْكَ فِي نِعْمَةٍ وَعَافِيَةٍ وَسِتْرٍ، فَأَتِمَّ…
हे अल्लाह, मैं संध्या के समय को तेरा आशीर्वाद, शुभता और मेरी खामियों का पर्दा डाल कर मनाता हूँ, तो अपनी कृपा पूर्ण कर, अपने वरदान और अपने सं…
×3
29
يَا رَبِّ لَكَ الْحَمْدُ كَمَا يَنْبَغِي لِجَلَالِ وَجْهِكَ وَلِعَظِيمِ سُلْطَان…
हे मेरे रब, तुझे सलाम उसकी शोभा और उसकी महत्ता के योग्य है।
30
اللَّهُمَّ مَتِّعْنِي بِسَمْعِي وَبَصَرِي وَاجْعَلْهُمَا الْوَارِثَ مِنِّي
हे अल्लाह, मुझे सुनने और देखने का आनंद दे, और इन्हें मेरी आखिरी शक्तियों में बना दे।
31
اللَّهُمَّ مَا أَمْسَى بِي مِنْ نِعْمَةٍ فَمِنْكَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ
हे अल्लाह, जो भी आशीर्वाद मुझे इस शाम में है, वह सिर्फ तेरे ही से है, तेरा कोई साझी नहीं।
32
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ
हे अल्लाह, मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और आग से शरण चाहता हूँ।
×3
33
اللَّهُمَّ آتِ نَفْسِي تَقْوَاهَا وَزَكِّهَا أَنْتَ خَيْرُ مَنْ زَكَّاهَا
हे अल्लाह, मेरी आत्मा की पवित्रता और उसकी शुद्धि कर — तू सबसे अच्छा उसकी शुद्धि करने वाला है।
34
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ…
हे अल्लाह, मैं चिंता, दुःख, कमजोरी, आलस्य, कायरता और कंजूसी से, ऋण से और मनुष्यों के अधीन होने से तुझमें शरण माँगता हूँ।
35
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ حُبَّكَ وَحُبَّ مَنْ يُحِبُّكَ وَحُبَّ عَمَلٍ يُقَر…
हे अल्लाह, मैं तुझसे अपने प्रेम, तुझसे प्रेम करने वालों का प्रेम, और उन कर्मों का प्रेम माँगता हूँ जो मुझे तुझसे प्रेम के करीब ले आते हैं।
36
اللَّهُمَّ اجْعَلْ خَيْرَ عُمْرِي آخِرَهُ وَخَيْرَ عَمَلِي خَوَاتِمَهُ
हे अल्लाह, मेरे जीवन के सर्वोत्तम भाग और मेरे कर्मों का सर्वोत्तम अंत कर।
37
اللَّهُمَّ بَارِكْ لِي فِي لَيْلَتِي هَذِهِ
हे अल्लाह, इस रात में मुझे व्रत रख, और मेरी रक्षा कर।
38
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَر…
मुझे अपने ऊपर भरोसा है। तेरा कोई साझी नहीं। मुझमें भरोसा इसी में है और तू विशाल सिंहासन का स्वामी है।
×7
39
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ عَدَدَ خَلْقِهِ وَرِضَا نَفْسِهِ وَزِنَةَ عَرْشِه…
अल्लाह की महिमा और praising, जैसे उसकी सृष्टि की संख्या के बराबर, जैसी उसे खुशी हो, उसके सिंहासन जितनी भारी, और उसके शब्दों जितनी विस्तृत।
×3
40
أَمْسَيْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ وَعَلَى دِ…
हमने इस रात को इस्लाम के प्राकृतिक धर्म, सच्चे समर्पण के शब्द, हमारे पैगंबर मुहम्मद के धर्म और हमारे पिता इब्राहीम के मार्ग, सीधा मुसलमान मे…
41
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَى نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ
हे अल्लाह, हमारे नबी मुहम्मद पर दया और سلام भेज।
×10
42
اللَّهُمَّ بِكَ أَمْسَيْنَا وَبِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ وَإ…
हे अल्लाह, आप ही के द्वारा हम रात में प्रवेश करते हैं, आप ही के द्वारा हम सुबह में प्रवेश करते हैं, आप ही के द्वारा हम जीते हैं, आप ही के द्…
43
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا…
उस नाम से अल्लाह कि जिसके नाम से पृथ्वी और स्वर्ग में कोई हानि नहीं पहुंचा सकता, और वही सब सुनने वाला, सब जानने वाला है।
×3
44
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا وَبِمُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَ…
मैं अल्लाह से संतुष्ट हूँ कि वह मेरा रब है, इस्लाम मेरा धर्म है, और मुहम्मद (अल्लाह का सलाम हो उस पर) मेरा नबी है।
×3
45
اللَّهُمَّ مَا أَمْسَى بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ وَ…
हे अल्लाह, जो भी आशीर्वाद मैंने या आपकी किसी भी एक रचना को इस शाम में मिला है, वह सिर्फ आप ही के हैं, उनका कोई भागीदार नहीं। तो सभी प्रशंसा …
46
اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَ…
हे अल्लाह, अनदेखे और देखे गए का ज्ञाता, आकाश और पृथ्वी का रचयिता, हर चीज का स्वामी और शासक है। मैं गवाही देता हूँ कि कोई ईश्वर नहीं बल्कि आप…
47
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
मैं अल्लाह के संपूर्ण शब्दों की शरण में हूँ, जो उसके बनाने की बुरी चीजों से बुराई से मेरी रक्षा करें।
×3
48
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذِهِ اللَّيْلَةِ وَخَيْرَ مَا فِيهَا وَأَع…
हे अल्लाह, मैं तुझसे इस रात की भलाई और उसमें जो कुछ हो, माँगता हूँ, और इसकी बुराई से और उसमें मौजूद बुराई से शरण चाहता हूँ।
49
اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ لَ…
हे अल्लाह, आकाश और पृथ्वी का रचयिता, अनदेखे और देखे गए का ज्ञाता, तेरे सिवा कोई ईश्वर नहीं, हर चीज का स्वामी और उसका शासक है।
50
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنْ عِبَادِكَ الصَّالِحِينَ الَّذِينَ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِ…
हे अल्लाह, मुझे अपने धर्मपरायण सेवकों में से बना, जिन्हें न तो कोई डर होगा, न ही वे दुःखी होंगे।
51
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَم…
किसी का अधिकार नहीं कि उसकी पूजा की जाए बल्कि अल्लाह के साथ कोई साझी नहीं। उसका ही अधिकार है और उसकी प्रशंसा। वह हर चीज पर सक्षम है। (100 बा…
×100
52
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
अल्लाह की महिमा और प्रशंसा। (100 बार — पाप माफ़ किए जाते हैं, चाहे समुद्र की फेन जैसी हों)
×100
53
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ और उसकी तरफ रुख़ करता हूँ। (100 बार रोजाना)
×100
54
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
कोई शक्ति या बल नहीं ही बल्कि अल्लाह के साथ है। (स्वर्ग का खज़ाना)
×10
55
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِب…
हे अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद के परिवार पर अश्फाक भेज, जैसे कि तू Իब्राहीम पर और उसके परिवार पर भेजा।तेरी तारीफ़ और गरिमा है।
×10
56
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ
हे अल्लाह, मैं कृपा के अपने अनंत उपकार से माँगता हूँ।
57
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ وَل…
हे सदा जीवित, हे आत्मसात्, अपनी दया से मेरी मदद कर। मेरे सभी मामलों को सही कर और मुझे अपने ऊपर छोड़ मत। पल भर भी नहीं।
×3
58
اللَّهُمَّ إِنِّي أَمْسَيْتُ أُنْشِدُكَ بِمَا أَنْشَدَكَ بِهِ حَمَلَةُ عَرْشِكَ …
हे अल्लाह, मैंने रात प्रवेश की है और तुम्हारे सिंहासन वाले, तुम्हारे स्वर्गदूतों, तुम्हारे नबियों और तुम्हारे दूतों के समान प्रार्थना के साथ…
59
اللَّهُمَّ اجْعَلْ لَيْلَتِي هَذِهِ خَيْرَ لَيْلَةٍ
हे अल्लाह, मेरी इस रात को सबसे अच्छी रात बना दे।
60
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ صِدْقَ التَّوَكُّلِ عَلَيْكَ وَحُسْنَ الظَّنِّ بِكَ
हे अल्लाह, मैं तुझसे ईमानदारी से भरोसा और तुझसे अच्छी उम्मीदें माँगता हूँ।
61
اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي حُسْنَ الْخَاتِمَةِ
हे अल्लाह, मुझे अच्छी समाप्ति की खुशी दे।
62
اللَّهُمَّ إِنِّي أُحِبُّكَ وَأُحِبُّ مَنْ يُحِبُّكَ
हे अल्लाह, मैं तुझे प्रेम करता हूँ और तुझे प्रेम करने वालों से प्रेम करता हूँ।
63
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، عَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَأَنْتَ…
हे अल्लाह, तू ही मेरा रब है, कोई ईश्वर नहीं सिवाय तेरे। तुझ ही में मेरा भरोसा है और तू ही दिग्गज सिंहासन का रब है।
×7
64
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي ا…
उस नाम से अल्लाह कि जिसके नाम से पृथ्वी और स्वर्ग में कोई हानि नहीं पहुंचा सकता, और वही सब सुनने वाला, सब जानने वाला है।
×3