Qurani·قرآني
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हे सदा जीवित, हे आत्मसात्, अपनी दया से मेरी मदद कर। मेरे सभी मामलों को सही कर और — शाम के अज़कार

يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ وَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ
लिप्यंतरण: Yaa Hayyu yaa Qayyoomu birahmatika astagheethu aslih lee sha'nee kullahu wa laa takilnee ilaa nafsee tarfata 'ayn
अनुवाद: हे सदा जीवित, हे आत्मसात्, अपनी दया से मेरी मदद कर। मेरे सभी मामलों को सही कर और मुझे अपने ऊपर छोड़ मत। पल भर भी नहीं।
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संदर्भ: Al-Hakim 1:545
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