Qurani·قرآني
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ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में आफ़ियत (सलामती) माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! म — शाम के अज़कार

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي دِينِي وَدُنْيَايَ وَأَهْلِي وَمَالِي
लिप्यंतरण: Allaahumma innee as'alukal-'aafiyata fid-dunyaa wal-aakhirah. Allaahumma innee as'alukal-'afwa wal-'aafiyata fee deenee wa dunyaaya wa ahlee wa maalee
अनुवाद: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में आफ़ियत (सलामती) माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे अपने दीन, अपनी दुनिया, अपने परिवार और अपने माल में माफ़ी और आफ़ियत का सवाल करता हूँ।
संदर्भ: Abu Dawud 4:318
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