मैं अल्लाह से रज़ामंद हूँ, अपने राष्ट्र, अपने धर्म और अपने पैगंबर मुहम्मद (शांति — शाम के अज़कार
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ، أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ، وَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ
लिप्यंतरण: Yaa Hayyu yaa Qayyoomu birahmatika astagheethu, aslih lee sha'nee kullahu, wa laa takilnee ilaa nafsee tarfata 'ayn
अनुवाद: मैं अल्लाह से रज़ामंद हूँ, अपने राष्ट्र, अपने धर्म और अपने पैगंबर मुहम्मद (शांति और पर्दापण उन पर हो) के साथ।
संदर्भ: Hakim 1:545