Qurani·قرآني
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ऐ अल्लाह! मैंने शाम की और मैं तुझे, तेरे अर्श के उठाने वालों को, तेरे फ़रिश्तों — शाम के अज़कार

اللَّهُمَّ إِنِّي أَمْسَيْتُ أُشْهِدُكَ وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ، وَمَلَائِكَتَكَ وَجَمِيعَ خَلْقِكَ، أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ، وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ
लिप्यंतरण: Allaahumma innee amsaytu ush-hiduka wa ush-hidu hamalata 'arshika, wa malaa'ikataka wa jamee'a khalqika, annaka antallahu laa ilaaha illaa anta wahdaka laa shareeka lak, wa anna Muhammadan 'abduka wa rasooluk
अनुवाद: ऐ अल्लाह! मैंने शाम की और मैं तुझे, तेरे अर्श के उठाने वालों को, तेरे फ़रिश्तों को और तेरी तमाम मख़्लूक़ (सृष्टि) को गवाह बनाता हूँ कि बेशक तू ही अल्लाह है, तेरे सिवा कोई माबूद (पूज्य) नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई शरीक (साझेदार) नहीं और मुहम्मद ﷺ तेरे बंदे और रसूल हैं।
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संदर्भ: Abu Dawud 4:317
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