Qurani·قرآني
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ऐ अल्लाह! तू ही मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। तूने ही मुझे पैदा — शाम के अज़कार

اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ
लिप्यंतरण: Allaahumma anta rabbee laa ilaaha illaa anta, khalaqtanee wa anaa 'abduka, wa anaa 'alaa 'ahdika wa wa'dika mastata'tu, a'oodhu bika min sharri maa sana'tu, aboo'u laka bini'matika 'alayya, wa aboo'u bidhanbee faghfir lee fa'innahu laa yaghfirudh-dhunooba illaa anta
अनुवाद: ऐ अल्लाह! तू ही मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। तूने ही मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी ताक़त के मुताबिक़ तेरे अहद और वादे पर कायम हूँ। मैंने जो बुराइयाँ की हैं, उनके शर (बुराई) से तेरी पनाह माँगता हूँ। मुझ पर जो तेरी नेमतें हैं, मैं उनका इक़रार करता हूँ और अपने गुनाहों का भी इक़रार करता हूँ। बस मुझे माफ़ कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ नहीं कर सकता।
संदर्भ: Bukhari 7:150
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